कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४ / ५२ № 4 of 52 रचना ४ / ५२
१२ मई २०१६ 12 May 2016 १२ मई २०१६

सौदो सच जो saudo sach jo सौदो सच जो

मनुष

करे दिसु पहिञ्जे मन साँ, सौदो सच जो

लगंदों

तोखे मिठिड़ो सभ खाँ, मेवो सच जो

कूडु

विछाए, कंडा गुलनि में

चाहे लख-लख

रहिणो

आहे बागु सदाईं, साओ सच जो

अचनी

लुभाइन सुहिणा कपड़ा लखु लालच जा

मगर

न छदिजइं पहिंजे तन ताँ, चोलो सच जो

खणी

अँधेरो अचनि सवें तूफान कूड़ जा

पर

न विसाएँ सघन्दा बरंदडु दियड़ो, सच जो

फल

त ज़रूरी मिलणो आहे देर भले थे

कर

तूँ पाण साँ सिर्फ ‘कल्पना’ वादो

manush

kare disu pahinje man saan, saudo sach jo

·

lagandon

tokhe mithido sabh khaan, mewo sach jo

·

koodu

wichaae, kandaa gulani men

chaahe lakh-lakh

·

rahino

aahe baagu sadaaeen, saao sach jo

·

achanee

lubhaain suhinaa kapadaa lakhu laalach jaa

·

magar

n chadijain pahinje tan taan, cholo sach jo

·

khanee

andhero achani sawen toophaan kood jaa

·

par

n wisaaen saghandaa barandadu diyado, sach jo

·

phal

t zarooree milano aahe der bhale the

·

kar

toon paan saan sirph ‘kalpanaa’ waado

मनुष

करे दिसु पहिञ्जे मन साँ, सौदो सच जो

लगंदों

तोखे मिठिड़ो सभ खाँ, मेवो सच जो

कूडु

विछाए, कंडा गुलनि में

चाहे लख-लख

रहिणो

आहे बागु सदाईं, साओ सच जो

अचनी

लुभाइन सुहिणा कपड़ा लखु लालच जा

मगर

न छदिजइं पहिंजे तन ताँ, चोलो सच जो

खणी

अँधेरो अचनि सवें तूफान कूड़ जा

पर

न विसाएँ सघन्दा बरंदडु दियड़ो, सच जो

फल

त ज़रूरी मिलणो आहे देर भले थे

कर

तूँ पाण साँ सिर्फ ‘कल्पना’ वादो

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗