कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३९ / ५२ № 39 of 52 रचना ३९ / ५२
२४ अगस्त २०१६ 24 August 2016 २४ अगस्त २०१६

सूरजु ड्रिजण लगो आ sooraju drijan lago aa सूरजु ड्रिजण लगो आ

दिसी सीअ जा तेवर सूरजु, ड्रिजण लगो

आ।

उथे

लेट पर सेघु शाम जो, सुम्हण लगो आ।

उस

बि कया अघ चौणा, घुरिज दिसी

माण्हुनि जी

तदहिं

बि हथ जोड़े हर माण्हूँ गिन्हण लगो आ।

जिति-किथि

कुहरे-सीय, लगायो गौरो

कर्फ़्यू

खणी

साणु हथियार, सनाटो फिरण लगो

आ।

दिसी पखिनि खे

दकंदो, पहिंजी गोदि विहारे

हुननि

लाइ आखेरो दर्खतु बधण लगो आ।

मफ़लर, शालूँ, कोट त कनि प्या

गरमु अमीरी

disee seea jaa tewar sooraju, drijan lago

aa

·

uthe

let par seghu shaam jo, sumhan lago aa

·

us

bi kayaa agh chaunaa, ghurij disee

maanhuni jee

·

tadahin

bi hath jode har maanhoon ginhan lago aa

·

jiti-kithi

kuhare-seey, lagaayo gauro

karfyoo

·

khanee

saanu hathiyaar, sanaato phiran lago

aa

·

disee pakhini khe

dakando, pahinjee godi wihaare

·

hunani

laai aakhero darkhatu badhan lago aa

·

mafalar, shaaloon, kot t kani pyaa

garamu ameeree

दिसी सीअ जा तेवर सूरजु, ड्रिजण लगो

आ।

उथे

लेट पर सेघु शाम जो, सुम्हण लगो आ।

उस

बि कया अघ चौणा, घुरिज दिसी

माण्हुनि जी

तदहिं

बि हथ जोड़े हर माण्हूँ गिन्हण लगो आ।

जिति-किथि

कुहरे-सीय, लगायो गौरो

कर्फ़्यू

खणी

साणु हथियार, सनाटो फिरण लगो

आ।

दिसी पखिनि खे

दकंदो, पहिंजी गोदि विहारे

हुननि

लाइ आखेरो दर्खतु बधण लगो आ।

मफ़लर, शालूँ, कोट त कनि प्या

गरमु अमीरी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗