कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १५ / ५२ № 15 of 52 रचना १५ / ५२
५ जून २०१६ 5 June 2016 ५ जून २०१६

हिक-हिक बूँद पियारयो पाणी hik-hik boond piyaarayo paanee हिक-हिक बूँद पियारयो पाणी

कल्ह

ताईं प्यो खिले खुशीअ साँ, वहंदो पाणी।

॥

रोए

थो अजु बोतल में, वेचारो पाणी।

॥

खाली

दिला दिसी गुरबत जे हर हिक घर में

॥

केरु

चटे व्यो तरे संदा, सोचे थो पाणी।

॥

प्यासा

पखी छितिनि ते गोल्हे, पया फिरनि था

॥

दिसिजे तिनि खे नथो भरयलु को भाँडो पाणी।

॥

मानसूनु-सावणु पिणि पहुता खणी कटोरो

॥

धरे

फ़कीरी वेषु घुरनि प्या ढुकिड़ो पाणी।

॥

तो

ई मनुष वहायो कुहाड़ो, खुदि पेरनि ते

॥

खाट्र

हणी खोट्रियइ

kalh

taaeen pyo khile khusheea saan, wahando paanee

·

roe

tho aju botal men, wechaaro paanee

·

khaalee

dilaa disee gurabat je har hik ghar men

·

keru

chate wyo tare sandaa, soche tho paanee

·

pyaasaa

pakhee chitini te golhe, payaa phirani thaa

·

disije tini khe natho bharayalu ko bhaando paanee

·

maanasoonu-saawanu pini pahutaa khanee katoro

·

dhare

fakeeree weshu ghurani pyaa dhukido paanee

·

to

ee manush wahaayo kuhaado, khudi perani te

·

khaatr

hanee khotriyai

कल्ह

ताईं प्यो खिले खुशीअ साँ, वहंदो पाणी।

॥

रोए

थो अजु बोतल में, वेचारो पाणी।

॥

खाली

दिला दिसी गुरबत जे हर हिक घर में

॥

केरु

चटे व्यो तरे संदा, सोचे थो पाणी।

॥

प्यासा

पखी छितिनि ते गोल्हे, पया फिरनि था

॥

दिसिजे तिनि खे नथो भरयलु को भाँडो पाणी।

॥

मानसूनु-सावणु पिणि पहुता खणी कटोरो

॥

धरे

फ़कीरी वेषु घुरनि प्या ढुकिड़ो पाणी।

॥

तो

ई मनुष वहायो कुहाड़ो, खुदि पेरनि ते

॥

खाट्र

हणी खोट्रियइ

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗