कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ३१ / ५२ № 31 of 52 रचना ३१ / ५२
११ अगस्त २०१६ 11 August 2016 ११ अगस्त २०१६

उभ में उदणु सुठो आ ubh men udanu sutho aa उभ में उदणु सुठो आ

सुख

साँ गदु थोरे दुख जो पिणि हुजणु सुठो आ।

॥

पहिंजी

बुरी नज़र खाँ मनिड़ा, बचणु सुठो आ।

॥

जेसीं

सदु न करे किस्मत, को खोले रस्तो

॥

छदे

वहाइणु लुड़िक सबिरु कुछ रखणु सुठो आ।

॥

नाहिं

ज़रूरी मिले सभिनि खे सूर्जु समूरो

॥

ऊँदहि

खाँ हिकु दियो बि घर में बरणु सुठो आ।

॥

बोल मिठा, व्यवहारु, सलीको, मानु वदनि

जो

॥

ख्वारु थियण खाँ, नंढिपण में ही सिखणु

सुठो आ।

॥

हिक

हंधि हूँदा चार, बिलाशक वजंदा

sukh

saan gadu thore dukh jo pini hujanu sutho aa

·

pahinjee

buree nazar khaan manidaa, bachanu sutho aa

·

jeseen

sadu n kare kismat, ko khole rasto

·

chade

wahaainu ludik sabiru kuch rakhanu sutho aa

·

naahin

zarooree mile sabhini khe soorju samooro

·

oondahi

khaan hiku diyo bi ghar men baranu sutho aa

·

bol mithaa, wyawahaaru, saleeko, maanu wadani

jo

·

khvaaru thiyan khaan, nandhipan men hee sikhanu

sutho aa

·

hik

handhi hoondaa chaar, bilaashak wajandaa

सुख

साँ गदु थोरे दुख जो पिणि हुजणु सुठो आ।

॥

पहिंजी

बुरी नज़र खाँ मनिड़ा, बचणु सुठो आ।

॥

जेसीं

सदु न करे किस्मत, को खोले रस्तो

॥

छदे

वहाइणु लुड़िक सबिरु कुछ रखणु सुठो आ।

॥

नाहिं

ज़रूरी मिले सभिनि खे सूर्जु समूरो

॥

ऊँदहि

खाँ हिकु दियो बि घर में बरणु सुठो आ।

॥

बोल मिठा, व्यवहारु, सलीको, मानु वदनि

जो

॥

ख्वारु थियण खाँ, नंढिपण में ही सिखणु

सुठो आ।

॥

हिक

हंधि हूँदा चार, बिलाशक वजंदा

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗