उभ में शहर ubh men shahar उभ में शहर
पंज-फुटी पिञिरन में पलंदा, घर दिठा सें।
प्या
उदनि उभ में शहर, बेपर दिठा सें।
काह
कातिनि जी जदहिं खाँ थी बननि ते
मोर
बन-बन जा कटायल-पर दिठा
सें।
हर
पहर दिसिजनि खुल्यल प्या माल-होटल
बंद
लेकिन सभु, दिलिन जा, दर दिठा
सें।
अन्न-जल
जा दे पई होका हुकूमत
ऐं
हरनि-खेतनि जा हक़, बंजर दिठा सें।
सचु
त आहे,
नारी
आ नारीय जी दुश्मन
पर
नज़र में तिनि जी दोही, नर दिठा सें।
दई-वठी दिल,
panj-phutee piniran men palandaa, ghar dithaa sen
pyaa
udani ubh men shahar, bepar dithaa sen
kaah
kaatini jee jadahin khaan thee banani te
mor
ban-ban jaa kataayal-par dithaa
sen
har
pahar disijani khulyal pyaa maal-hotal
band
lekin sabhu, dilin jaa, dar dithaa
sen
ann-jal
jaa de paee hokaa hukoomat
ain
harani-khetani jaa haq, banjar dithaa sen
sachu
t aahe,
naaree
aa naareey jee dushman
par
nazar men tini jee dohee, nar dithaa sen
daee-wathee dil,
पंज-फुटी पिञिरन में पलंदा, घर दिठा सें।
प्या
उदनि उभ में शहर, बेपर दिठा सें।
काह
कातिनि जी जदहिं खाँ थी बननि ते
मोर
बन-बन जा कटायल-पर दिठा
सें।
हर
पहर दिसिजनि खुल्यल प्या माल-होटल
बंद
लेकिन सभु, दिलिन जा, दर दिठा
सें।
अन्न-जल
जा दे पई होका हुकूमत
ऐं
हरनि-खेतनि जा हक़, बंजर दिठा सें।
सचु
त आहे,
नारी
आ नारीय जी दुश्मन
पर
नज़र में तिनि जी दोही, नर दिठा सें।
दई-वठी दिल,