कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २० / ५२ № 20 of 52 रचना २० / ५२
७ जुलाई २०१६ 7 July 2016 ७ जुलाई २०१६

उभ में शहर ubh men shahar उभ में शहर

पंज-फुटी पिञिरन में पलंदा, घर दिठा सें।

प्या

उदनि उभ में शहर, बेपर दिठा सें।

काह

कातिनि जी जदहिं खाँ थी बननि ते

मोर

बन-बन जा कटायल-पर दिठा

सें।

हर

पहर दिसिजनि खुल्यल प्या माल-होटल

बंद

लेकिन सभु, दिलिन जा, दर दिठा

सें।

अन्न-जल

जा दे पई होका हुकूमत

ऐं

हरनि-खेतनि जा हक़, बंजर दिठा सें।

सचु

त आहे,

नारी

आ नारीय जी दुश्मन

पर

नज़र में तिनि जी दोही, नर दिठा सें।

दई-वठी दिल,

panj-phutee piniran men palandaa, ghar dithaa sen

·

pyaa

udani ubh men shahar, bepar dithaa sen

·

kaah

kaatini jee jadahin khaan thee banani te

·

mor

ban-ban jaa kataayal-par dithaa

sen

·

har

pahar disijani khulyal pyaa maal-hotal

·

band

lekin sabhu, dilin jaa, dar dithaa

sen

·

ann-jal

jaa de paee hokaa hukoomat

·

ain

harani-khetani jaa haq, banjar dithaa sen

·

sachu

t aahe,

naaree

aa naareey jee dushman

·

par

nazar men tini jee dohee, nar dithaa sen

·

daee-wathee dil,

पंज-फुटी पिञिरन में पलंदा, घर दिठा सें।

प्या

उदनि उभ में शहर, बेपर दिठा सें।

काह

कातिनि जी जदहिं खाँ थी बननि ते

मोर

बन-बन जा कटायल-पर दिठा

सें।

हर

पहर दिसिजनि खुल्यल प्या माल-होटल

बंद

लेकिन सभु, दिलिन जा, दर दिठा

सें।

अन्न-जल

जा दे पई होका हुकूमत

ऐं

हरनि-खेतनि जा हक़, बंजर दिठा सें।

सचु

त आहे,

नारी

आ नारीय जी दुश्मन

पर

नज़र में तिनि जी दोही, नर दिठा सें।

दई-वठी दिल,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗