कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना १९ / ११४ № 19 of 114 रचना १९ / ११४
२९ जून २०१६ 29 June 2016 २९ जून २०१६

सबसे पहले हिन्दी/लघु-कहानी sabase pahale hindee/laghu-kahaanee सबसे पहले हिन्दी/लघु-कहानी

“माँ, हम मूवी

देखने जा रहे हैं, रात का खाना भी बाहर ही

खाकर आएँगे, गुड़िया सो रही है,

जाग जाए तो उसे ज़रा बहला देना”

कहते हुए अतुल ने अचला की ओर देखा। अचला ने

मुस्कुराकर हामी भर दी। बेटे की कल छुट्टी है तो एक दिन बहू के साथ घूमना फिरना हो

जाता है। अचला को बाहर का खाना नहीं रुचता और बढ़ती उम्र में घूमने या मूवी देखने

का भी कोई शौक नहीं तो वो कहीं बेटे-बहू के साथ नहीं जाती। वैसे तो वे अपनी तीन

“maan, ham moowee

dekhane jaa rahe hain, raat kaa khaanaa bhee baahar hee

khaakar aaenge, gudiyaa so rahee hai,

jaag jaae to use zaraa bahalaa denaa”

·

kahate hue atul ne achalaa kee or dekhaa achalaa ne

muskuraakar haamee bhar dee bete kee kal chuttee hai to ek din bahoo ke saath ghoomanaa phiranaa ho

jaataa hai achalaa ko baahar kaa khaanaa naheen ruchataa aur bढ़tee umr men ghoomane yaa moowee dekhane

kaa bhee koee shauk naheen to wo kaheen bete-bahoo ke saath naheen jaatee waise to we apanee teen

“माँ, हम मूवी

देखने जा रहे हैं, रात का खाना भी बाहर ही

खाकर आएँगे, गुड़िया सो रही है,

जाग जाए तो उसे ज़रा बहला देना”

कहते हुए अतुल ने अचला की ओर देखा। अचला ने

मुस्कुराकर हामी भर दी। बेटे की कल छुट्टी है तो एक दिन बहू के साथ घूमना फिरना हो

जाता है। अचला को बाहर का खाना नहीं रुचता और बढ़ती उम्र में घूमने या मूवी देखने

का भी कोई शौक नहीं तो वो कहीं बेटे-बहू के साथ नहीं जाती। वैसे तो वे अपनी तीन

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗