कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ५० / ११४ № 50 of 114 रचना ५० / ११४
२६ अप्रैल २०१७ 26 April 2017 २६ अप्रैल २०१७

अपने अपने हिस्से की धूप apane apane hisse kee dhoop अपने अपने हिस्से की धूप

एक

छोटे से स्टेशन पर गाड़ी रुकी तो सामने ही गुमटी पर चाय बनती देखकर अभिनव नीचे

उतरा. अपना छोटा सा बैग उसने हाथ में ही ले लिया था. चाय पीकर जैसे ही पैसे

निकालने लगा, गाड़ी सरकने लग गई. चाय वाला चिल्लाया-

“पैसे रहने दो बेटे, जल्दी जाओ”

अभिनव

बदहवासी में दौड़ लगाकर जैसे ही चढ़ा, पीछे

से किसी का धक्का लगा और हाथ से बैग छूटकर वहीँ गिर गया. गाड़ी ने गति पकड़ ली थी, वो तुरंत कूद पड़ा तो

ek

chote se steshan par gaadee rukee to saamane hee gumatee par chaay banatee dekhakar abhinaw neeche

utaraa apanaa chotaa saa baig usane haath men hee le liyaa thaa chaay peekar jaise hee paise

nikaalane lagaa, gaadee sarakane lag gaee chaay waalaa chillaayaa-

·

“paise rahane do bete, jaldee jaao”

·

abhinaw

badahawaasee men daud lagaakar jaise hee chढ़aa, peeche

se kisee kaa dhakkaa lagaa aur haath se baig chootakar waheen gir gayaa gaadee ne gati pakad lee thee, wo turant kood padaa to

एक

छोटे से स्टेशन पर गाड़ी रुकी तो सामने ही गुमटी पर चाय बनती देखकर अभिनव नीचे

उतरा. अपना छोटा सा बैग उसने हाथ में ही ले लिया था. चाय पीकर जैसे ही पैसे

निकालने लगा, गाड़ी सरकने लग गई. चाय वाला चिल्लाया-

“पैसे रहने दो बेटे, जल्दी जाओ”

अभिनव

बदहवासी में दौड़ लगाकर जैसे ही चढ़ा, पीछे

से किसी का धक्का लगा और हाथ से बैग छूटकर वहीँ गिर गया. गाड़ी ने गति पकड़ ली थी, वो तुरंत कूद पड़ा तो

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗