कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १४३ / १६३ № 143 of 163 रचना १४३ / १६३
१८ नवम्बर २०१९ 18 November 2019 १८ नवम्बर २०१९

नन्हीं चिड़िया नन्हीं आशा nanheen chidiyaa nanheen aashaa नन्हीं चिड़िया नन्हीं आशा

टुकुर टुकुर कर ताके चिड़िया

नन्हाँ उसका भूखा।

कैसे जाए दाना लाने

खेतों खड़ा बिजूखा।

सोच रही वो, काश! यहाँ से

यह प्राणी हट जाए

झट से उड़कर, चोंच मारकर

कुछ अनाज ले आए।

पेट भरे चूज़े का खाकर

भोजन रूखा सूखा।

जाने वो इंसानी आदत

क्रूर कुटिलतम चालें।

पंछी को भी मार उदर के

झट से करे हवाले।

मूक प्राणियों के पीड़न का

मौका कब वो चूका।

नन्हीं चिड़िया, नन्हीं आशा

करे न अहित किसी का।

नहीं छीनना फितरत इसकी

और न संग्रह सीखा।

मानव में ही उसने पाया

फीका रंग लहू का।

tukur tukur kar taake chidiyaa

nanhaan usakaa bhookhaa

kaise jaae daanaa laane

kheton khadaa bijookhaa

·

soch rahee wo, kaash! yahaan se

yah praanee hat jaae

jhat se udakar, chonch maarakar

kuch anaaj le aae

·

pet bhare chooze kaa khaakar

bhojan rookhaa sookhaa

·

jaane wo insaanee aadat

kroor kutilatam chaalen

panchee ko bhee maar udar ke

jhat se kare hawaale

·

mook praaniyon ke peedan kaa

maukaa kab wo chookaa

·

nanheen chidiyaa, nanheen aashaa

kare n ahit kisee kaa

naheen cheenanaa phitarat isakee

aur n sangrah seekhaa

·

maanaw men hee usane paayaa

pheekaa rang lahoo kaa

टुकुर टुकुर कर ताके चिड़िया

नन्हाँ उसका भूखा।

कैसे जाए दाना लाने

खेतों खड़ा बिजूखा।

सोच रही वो, काश! यहाँ से

यह प्राणी हट जाए

झट से उड़कर, चोंच मारकर

कुछ अनाज ले आए।

पेट भरे चूज़े का खाकर

भोजन रूखा सूखा।

जाने वो इंसानी आदत

क्रूर कुटिलतम चालें।

पंछी को भी मार उदर के

झट से करे हवाले।

मूक प्राणियों के पीड़न का

मौका कब वो चूका।

नन्हीं चिड़िया, नन्हीं आशा

करे न अहित किसी का।

नहीं छीनना फितरत इसकी

और न संग्रह सीखा।

मानव में ही उसने पाया

फीका रंग लहू का।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗