कह-मुकरियाँ 1से 5 kah-mukariyaan 1se 5 कह-मुकरियाँ 1से 5
1)
रखता मुझको अंग लगाकर।
चलती उसके संग लजाकर।
लगे सहज उसका अपनापन।
क्या सखि, साजन?
ना सखि, दामन!
2)
दिन में तो वो खूब तपाए।
रात कभी भी पास न आए।
फिर भी खुशियाँ देता जी भर।
क्या सखि साजन?
ना सखि, दिनकर!
3)
वो अपनी मनमानी करता।
कुछ माँगूँ तो कान न धरता।
कठपुतली सा नाच नचाता।
क्या सखि साजन?
नहीं, विधाता!
४)
भरी भीड़ में पास बुलाया।
गोद उठाकर चाँद दिखाया।
मन पाखी बन सुध-बुध भूला।
क्या सखि साजन?
ना री झूला!
५)
दूर-दूर के नवल नज़ारे।
उसकी आँखों देखूँ सारे।
कभी न देता मुझको धोखा।
क्या सखि साजन?
नहीं, झरोखा!
1)
rakhataa mujhako ang lagaakar
chalatee usake sang lajaakar
lage sahaj usakaa apanaapan
kyaa sakhi, saajan?
naa sakhi, daaman!
2)
din men to wo khoob tapaae
raat kabhee bhee paas n aae
phir bhee khushiyaan detaa jee bhar
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, dinakar!
3)
wo apanee manamaanee karataa
kuch maangoon to kaan n dharataa
kathaputalee saa naach nachaataa
kyaa sakhi saajan?
naheen, widhaataa!
4)
bharee bheed men paas bulaayaa
god uthaakar chaand dikhaayaa
man paakhee ban sudh-budh bhoolaa
kyaa sakhi saajan?
naa ree jhoolaa!
5)
door-door ke nawal nazaare
usakee aankhon dekhoon saare
kabhee n detaa mujhako dhokhaa
kyaa sakhi saajan?
naheen, jharokhaa!
1)
रखता मुझको अंग लगाकर।
चलती उसके संग लजाकर।
लगे सहज उसका अपनापन।
क्या सखि, साजन?
ना सखि, दामन!
2)
दिन में तो वो खूब तपाए।
रात कभी भी पास न आए।
फिर भी खुशियाँ देता जी भर।
क्या सखि साजन?
ना सखि, दिनकर!
3)
वो अपनी मनमानी करता।
कुछ माँगूँ तो कान न धरता।
कठपुतली सा नाच नचाता।
क्या सखि साजन?
नहीं, विधाता!
४)
भरी भीड़ में पास बुलाया।
गोद उठाकर चाँद दिखाया।
मन पाखी बन सुध-बुध भूला।
क्या सखि साजन?
ना री झूला!
५)
दूर-दूर के नवल नज़ारे।
उसकी आँखों देखूँ सारे।
कभी न देता मुझको धोखा।
क्या सखि साजन?
नहीं, झरोखा!