कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कह-मुकरी Kah-Mukri कह-मुकरी · रचना ३ / ११ № 3 of 11 रचना ३ / ११
१० नवम्बर २०१९ 10 November 2019 १० नवम्बर २०१९

कह-मुकरियाँ 21 से 25 kah-mukariyaan 21 se 25 कह-मुकरियाँ 21 से 25

21)

जब से उससे प्रीत लगाई।

थामे रहता सदा कलाई।

क्षण भर ढीला करे न बंधन।

क्या सखि साजन?

ना सखि, कंगन!

22)

जब भी माँगूँ उससे प्यार।

बेदर्दी कर देता वार।

फिर फिर होती मुझसे भूल

क्या सखि साजन?

ना सखि शूल!

23)

बागों में जब मुझसे मिलता।

मन मयूर बन सखी! मचलता।

कितना मोहक उसका शबाब!

क्या सखि साजन?

ना री गुलाब!

24)

जब बहार बागों में आए।

कहीं दूर से मुझे बुलाए।

मिलने को मन होता बेकल।

क्या सखि साजन?

ना सखि कोयल!

२५)

अपने मन का भेद छिपाए।

मेरे मन में सेंध लगाए।

रखता मुझ पर नज़र निरंतर।

क्या सखी साजन?

ना सखि, ईश्वर!

21)

jab se usase preet lagaaee

thaame rahataa sadaa kalaaee

kshan bhar dheelaa kare n bandhan

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi, kangan!

·

22)

jab bhee maangoon usase pyaar

bedardee kar detaa waar

phir phir hotee mujhase bhool

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi shool!

·

23)

baagon men jab mujhase milataa

man mayoor ban sakhee! machalataa

kitanaa mohak usakaa shabaab!

kyaa sakhi saajan?

naa ree gulaab!

·

24)

jab bahaar baagon men aae

kaheen door se mujhe bulaae

milane ko man hotaa bekal

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi koyal!

·

25)

apane man kaa bhed chipaae

mere man men sendh lagaae

rakhataa mujh par nazar nirantar

kyaa sakhee saajan?

naa sakhi, eeshvar!

21)

जब से उससे प्रीत लगाई।

थामे रहता सदा कलाई।

क्षण भर ढीला करे न बंधन।

क्या सखि साजन?

ना सखि, कंगन!

22)

जब भी माँगूँ उससे प्यार।

बेदर्दी कर देता वार।

फिर फिर होती मुझसे भूल

क्या सखि साजन?

ना सखि शूल!

23)

बागों में जब मुझसे मिलता।

मन मयूर बन सखी! मचलता।

कितना मोहक उसका शबाब!

क्या सखि साजन?

ना री गुलाब!

24)

जब बहार बागों में आए।

कहीं दूर से मुझे बुलाए।

मिलने को मन होता बेकल।

क्या सखि साजन?

ना सखि कोयल!

२५)

अपने मन का भेद छिपाए।

मेरे मन में सेंध लगाए।

रखता मुझ पर नज़र निरंतर।

क्या सखी साजन?

ना सखि, ईश्वर!

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗