कह-मुकरियाँ 21 से 25 kah-mukariyaan 21 se 25 कह-मुकरियाँ 21 से 25
21)
जब से उससे प्रीत लगाई।
थामे रहता सदा कलाई।
क्षण भर ढीला करे न बंधन।
क्या सखि साजन?
ना सखि, कंगन!
22)
जब भी माँगूँ उससे प्यार।
बेदर्दी कर देता वार।
फिर फिर होती मुझसे भूल
क्या सखि साजन?
ना सखि शूल!
23)
बागों में जब मुझसे मिलता।
मन मयूर बन सखी! मचलता।
कितना मोहक उसका शबाब!
क्या सखि साजन?
ना री गुलाब!
24)
जब बहार बागों में आए।
कहीं दूर से मुझे बुलाए।
मिलने को मन होता बेकल।
क्या सखि साजन?
ना सखि कोयल!
२५)
अपने मन का भेद छिपाए।
मेरे मन में सेंध लगाए।
रखता मुझ पर नज़र निरंतर।
क्या सखी साजन?
ना सखि, ईश्वर!
21)
jab se usase preet lagaaee
thaame rahataa sadaa kalaaee
kshan bhar dheelaa kare n bandhan
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, kangan!
22)
jab bhee maangoon usase pyaar
bedardee kar detaa waar
phir phir hotee mujhase bhool
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi shool!
23)
baagon men jab mujhase milataa
man mayoor ban sakhee! machalataa
kitanaa mohak usakaa shabaab!
kyaa sakhi saajan?
naa ree gulaab!
24)
jab bahaar baagon men aae
kaheen door se mujhe bulaae
milane ko man hotaa bekal
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi koyal!
25)
apane man kaa bhed chipaae
mere man men sendh lagaae
rakhataa mujh par nazar nirantar
kyaa sakhee saajan?
naa sakhi, eeshvar!
21)
जब से उससे प्रीत लगाई।
थामे रहता सदा कलाई।
क्षण भर ढीला करे न बंधन।
क्या सखि साजन?
ना सखि, कंगन!
22)
जब भी माँगूँ उससे प्यार।
बेदर्दी कर देता वार।
फिर फिर होती मुझसे भूल
क्या सखि साजन?
ना सखि शूल!
23)
बागों में जब मुझसे मिलता।
मन मयूर बन सखी! मचलता।
कितना मोहक उसका शबाब!
क्या सखि साजन?
ना री गुलाब!
24)
जब बहार बागों में आए।
कहीं दूर से मुझे बुलाए।
मिलने को मन होता बेकल।
क्या सखि साजन?
ना सखि कोयल!
२५)
अपने मन का भेद छिपाए।
मेरे मन में सेंध लगाए।
रखता मुझ पर नज़र निरंतर।
क्या सखी साजन?
ना सखि, ईश्वर!