कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कह-मुकरी Kah-Mukri कह-मुकरी · रचना ५ / ११ № 5 of 11 रचना ५ / ११
१० नवम्बर २०१९ 10 November 2019 १० नवम्बर २०१९

कह-मुकरियाँ १६ से २० kah-mukariyaan 16 se 20 कह-मुकरियाँ १६ से २०

16)

चिपका-चिपका साथ घूमता।

बाल सूँघता, गाल चूमता।

लट उलझाए वो मतवाला।

क्या सखि साजन?

ना सखि बाला!

17)

जी करता है उड़कर जाऊँ।

कुछ पल उसके संग बिताऊँ।

लेकिन दूर बहुत उसका घर

क्या सखि, साजन?

ना सखि, अम्बर!

18)

रातों को जब नींद न आए।

खिड़की खोल सखी, वो आए।

बाग बाग हो जाता मनवा।

क्या सखि प्रियतम?

ना री पुरवा!

19

उसको प्यार बहुत करती हूँ।

मगर पास जाते डरती हूँ।

दूर खड़ी देखूँ जी भरकर

क्या सखि, साजन?

ना सखि सागर!

20)

जब भी मेरा मन भर आए।

आँसू पोंछे प्यार जताए।

रखता मेरा पल-पल खयाल

क्या सखि, साजन?

ना सखि, रुमाल!

16)

chipakaa-chipakaa saath ghoomataa

baal soonghataa, gaal choomataa

lat ulajhaae wo matawaalaa

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi baalaa!

·

17)

jee karataa hai udakar jaaoon

kuch pal usake sang bitaaoon

lekin door bahut usakaa ghar

kyaa sakhi, saajan?

naa sakhi, ambar!

·

18)

raaton ko jab neend n aae

khidakee khol sakhee, wo aae

baag baag ho jaataa manawaa

kyaa sakhi priyatam?

naa ree purawaa!

·

19

usako pyaar bahut karatee hoon

magar paas jaate daratee hoon

door khadee dekhoon jee bharakar

kyaa sakhi, saajan?

naa sakhi saagar!

·

20)

jab bhee meraa man bhar aae

aansoo ponche pyaar jataae

rakhataa meraa pal-pal khayaal

kyaa sakhi, saajan?

naa sakhi, rumaal!

16)

चिपका-चिपका साथ घूमता।

बाल सूँघता, गाल चूमता।

लट उलझाए वो मतवाला।

क्या सखि साजन?

ना सखि बाला!

17)

जी करता है उड़कर जाऊँ।

कुछ पल उसके संग बिताऊँ।

लेकिन दूर बहुत उसका घर

क्या सखि, साजन?

ना सखि, अम्बर!

18)

रातों को जब नींद न आए।

खिड़की खोल सखी, वो आए।

बाग बाग हो जाता मनवा।

क्या सखि प्रियतम?

ना री पुरवा!

19

उसको प्यार बहुत करती हूँ।

मगर पास जाते डरती हूँ।

दूर खड़ी देखूँ जी भरकर

क्या सखि, साजन?

ना सखि सागर!

20)

जब भी मेरा मन भर आए।

आँसू पोंछे प्यार जताए।

रखता मेरा पल-पल खयाल

क्या सखि, साजन?

ना सखि, रुमाल!

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗