कह-मुकरियाँ 46 से 54 kah-mukariyaan 46 se 54 कह-मुकरियाँ 46 से 54
46)
जब से उसने नाता जोड़ा।
पल भर को भी हाथ न छोड़ा।
सत्य कहूँ सखि मैं ना झूठी
क्या वो साजन?
नहीं, अँगूठी!
47)
महफिल-महफिल रंग जमाए।
अपने हाथों भंग पिलाए।
मधुर-मदिर लगते उसके गुन
क्या सखि प्रियतम?
ना सखि, फागुन!
48)
जाने कौन दिशा से आया।
मुखड़ा चूमा प्यार जताया।
सखि, मैं हो गई लालम-लाल
क्या सखि साजन?
ना री गुलाल!
49)
इंतज़ार में उसके रीते।
गिन-गिन दिवस महीने बीते।
आन रंग दी चुनरी-चोली
क्या सखि साजन?
ना री होली।
50)
अगर करे वो मुझसे बात।
दिखने लगती दिन में रात।
मादक हो जाता हर अंग
क्या सखि साजन?
ना सखि, भंग।
51)
उसका साथ बहुत मन भाए।
बिठा गोद में नित्य दिखाए।
खिली वादियाँ, झरने पर्वत
क्या सखि प्रियतम?
ना री कुदरत!
52)
अगर लबों से लब छू जाए।
अंतर्घट तक प्यास बुझाए।
बिन उसके जग लगता फ़ानी
क्या सखि साजन?
ना सखि पानी!
53)
मुझे देख जब वो मुस्काता।
सम्मोहित मन खिल खिल जाता।
छू लूँ तो कहता मत छेड़
क्या सखि साजन?
ना सखि पेड़!
54)
भिनसारे या साँझ सकारे।
जब देखे ले नाम पुकारे।
दीवाना चुप कभी न होता।
क्या सखि साजन?
ना सखि तोता!
46)
jab se usane naataa jodaa
pal bhar ko bhee haath n chodaa
saty kahoon sakhi main naa jhoothee
kyaa wo saajan?
naheen, angoothee!
47)
mahaphil-mahaphil rang jamaae
apane haathon bhang pilaae
madhur-madir lagate usake gun
kyaa sakhi priyatam?
naa sakhi, phaagun!
48)
jaane kaun dishaa se aayaa
mukhadaa choomaa pyaar jataayaa
sakhi, main ho gaee laalam-laal
kyaa sakhi saajan?
naa ree gulaal!
49)
intazaar men usake reete
gin-gin diwas maheene beete
aan rang dee chunaree-cholee
kyaa sakhi saajan?
naa ree holee
50)
agar kare wo mujhase baat
dikhane lagatee din men raat
maadak ho jaataa har ang
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, bhang
51)
usakaa saath bahut man bhaae
bithaa god men nity dikhaae
khilee waadiyaan, jharane parvat
kyaa sakhi priyatam?
naa ree kudarat!
52)
agar labon se lab choo jaae
antarghat tak pyaas bujhaae
bin usake jag lagataa faanee
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi paanee!
53)
mujhe dekh jab wo muskaataa
sammohit man khil khil jaataa
choo loon to kahataa mat ched
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi ped!
54)
bhinasaare yaa saanjh sakaare
jab dekhe le naam pukaare
deewaanaa chup kabhee n hotaa
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi totaa!
46)
जब से उसने नाता जोड़ा।
पल भर को भी हाथ न छोड़ा।
सत्य कहूँ सखि मैं ना झूठी
क्या वो साजन?
नहीं, अँगूठी!
47)
महफिल-महफिल रंग जमाए।
अपने हाथों भंग पिलाए।
मधुर-मदिर लगते उसके गुन
क्या सखि प्रियतम?
ना सखि, फागुन!
48)
जाने कौन दिशा से आया।
मुखड़ा चूमा प्यार जताया।
सखि, मैं हो गई लालम-लाल
क्या सखि साजन?
ना री गुलाल!
49)
इंतज़ार में उसके रीते।
गिन-गिन दिवस महीने बीते।
आन रंग दी चुनरी-चोली
क्या सखि साजन?
ना री होली।
50)
अगर करे वो मुझसे बात।
दिखने लगती दिन में रात।
मादक हो जाता हर अंग
क्या सखि साजन?
ना सखि, भंग।
51)
उसका साथ बहुत मन भाए।
बिठा गोद में नित्य दिखाए।
खिली वादियाँ, झरने पर्वत
क्या सखि प्रियतम?
ना री कुदरत!
52)
अगर लबों से लब छू जाए।
अंतर्घट तक प्यास बुझाए।
बिन उसके जग लगता फ़ानी
क्या सखि साजन?
ना सखि पानी!
53)
मुझे देख जब वो मुस्काता।
सम्मोहित मन खिल खिल जाता।
छू लूँ तो कहता मत छेड़
क्या सखि साजन?
ना सखि पेड़!
54)
भिनसारे या साँझ सकारे।
जब देखे ले नाम पुकारे।
दीवाना चुप कभी न होता।
क्या सखि साजन?
ना सखि तोता!