कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कह-मुकरी Kah-Mukri कह-मुकरी · रचना १ / ११ № 1 of 11 रचना १ / ११
१४ जून २०१८ 14 June 2018 १४ जून २०१८

कह-मुकरियाँ 46 से 54 kah-mukariyaan 46 se 54 कह-मुकरियाँ 46 से 54

46)

जब से उसने नाता जोड़ा।

पल भर को भी हाथ न छोड़ा।

सत्य कहूँ सखि मैं ना झूठी

क्या वो साजन?

नहीं, अँगूठी!

47)

महफिल-महफिल रंग जमाए।

अपने हाथों भंग पिलाए।

मधुर-मदिर लगते उसके गुन

क्या सखि प्रियतम?

ना सखि, फागुन!

48)

जाने कौन दिशा से आया।

मुखड़ा चूमा प्यार जताया।

सखि, मैं हो गई लालम-लाल

क्या सखि साजन?

ना री गुलाल!

49)

इंतज़ार में उसके रीते।

गिन-गिन दिवस महीने बीते।

आन रंग दी चुनरी-चोली

क्या सखि साजन?

ना री होली।

50)

अगर करे वो मुझसे बात।

दिखने लगती दिन में रात।

मादक हो जाता हर अंग

क्या सखि साजन?

ना सखि, भंग।

51)

उसका साथ बहुत मन भाए।

बिठा गोद में नित्य दिखाए।

खिली वादियाँ, झरने पर्वत

क्या सखि प्रियतम?

ना री कुदरत!

52)

अगर लबों से लब छू जाए।

अंतर्घट तक प्यास बुझाए।

बिन उसके जग लगता फ़ानी

क्या सखि साजन?

ना सखि पानी!

53)

मुझे देख जब वो मुस्काता।

सम्मोहित मन खिल खिल जाता।

छू लूँ तो कहता मत छेड़

क्या सखि साजन?

ना सखि पेड़!

54)

भिनसारे या साँझ सकारे।

जब देखे ले नाम पुकारे।

दीवाना चुप कभी न होता।

क्या सखि साजन?

ना सखि तोता!

46)

jab se usane naataa jodaa

pal bhar ko bhee haath n chodaa

saty kahoon sakhi main naa jhoothee

kyaa wo saajan?

naheen, angoothee!

·

47)

mahaphil-mahaphil rang jamaae

apane haathon bhang pilaae

madhur-madir lagate usake gun

kyaa sakhi priyatam?

naa sakhi, phaagun!

·

48)

jaane kaun dishaa se aayaa

mukhadaa choomaa pyaar jataayaa

sakhi, main ho gaee laalam-laal

kyaa sakhi saajan?

naa ree gulaal!

·

49)

intazaar men usake reete

gin-gin diwas maheene beete

aan rang dee chunaree-cholee

kyaa sakhi saajan?

naa ree holee

·

50)

agar kare wo mujhase baat

dikhane lagatee din men raat

maadak ho jaataa har ang

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi, bhang

·

51)

usakaa saath bahut man bhaae

bithaa god men nity dikhaae

khilee waadiyaan, jharane parvat

kyaa sakhi priyatam?

naa ree kudarat!

·

52)

agar labon se lab choo jaae

antarghat tak pyaas bujhaae

bin usake jag lagataa faanee

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi paanee!

·

53)

mujhe dekh jab wo muskaataa

sammohit man khil khil jaataa

choo loon to kahataa mat ched

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi ped!

·

54)

bhinasaare yaa saanjh sakaare

jab dekhe le naam pukaare

deewaanaa chup kabhee n hotaa

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi totaa!

46)

जब से उसने नाता जोड़ा।

पल भर को भी हाथ न छोड़ा।

सत्य कहूँ सखि मैं ना झूठी

क्या वो साजन?

नहीं, अँगूठी!

47)

महफिल-महफिल रंग जमाए।

अपने हाथों भंग पिलाए।

मधुर-मदिर लगते उसके गुन

क्या सखि प्रियतम?

ना सखि, फागुन!

48)

जाने कौन दिशा से आया।

मुखड़ा चूमा प्यार जताया।

सखि, मैं हो गई लालम-लाल

क्या सखि साजन?

ना री गुलाल!

49)

इंतज़ार में उसके रीते।

गिन-गिन दिवस महीने बीते।

आन रंग दी चुनरी-चोली

क्या सखि साजन?

ना री होली।

50)

अगर करे वो मुझसे बात।

दिखने लगती दिन में रात।

मादक हो जाता हर अंग

क्या सखि साजन?

ना सखि, भंग।

51)

उसका साथ बहुत मन भाए।

बिठा गोद में नित्य दिखाए।

खिली वादियाँ, झरने पर्वत

क्या सखि प्रियतम?

ना री कुदरत!

52)

अगर लबों से लब छू जाए।

अंतर्घट तक प्यास बुझाए।

बिन उसके जग लगता फ़ानी

क्या सखि साजन?

ना सखि पानी!

53)

मुझे देख जब वो मुस्काता।

सम्मोहित मन खिल खिल जाता।

छू लूँ तो कहता मत छेड़

क्या सखि साजन?

ना सखि पेड़!

54)

भिनसारे या साँझ सकारे।

जब देखे ले नाम पुकारे।

दीवाना चुप कभी न होता।

क्या सखि साजन?

ना सखि तोता!

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗