कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कह-मुकरी Kah-Mukri कह-मुकरी · रचना १० / ११ № 10 of 11 रचना १० / ११
२४ जनवरी २०२० 24 January 2020 २४ जनवरी २०२०

कहमुकरियाँ 36 से 40 kahamukariyaan 36 se 40 कहमुकरियाँ 36 से 40

हरजाई दिल तोड़ गया है।

मुझे बे खता छोड़ गया है।

नहीं भूल पाता उसको मन।

क्या सखि साजन?

ना सखि बचपन!

२७)

जब से उससे प्रीत लगाई।

थामे रहता सदा कलाई।

क्षण भर ढीला करे न बंधन।

क्या सखि साजन?

ना सखि, कंगन!

२८)

जब भी माँगूँ उससे प्यार।

बेदर्दी कर देता वार।

फिर फिर होती मुझसे भूल

क्या सखि साजन?

ना सखि शूल!

२९)

बागों में जब मुझसे मिलता।

मन मयूर बन सखी! मचलता।

देख-देख कर उसका शबाब!

क्या सखि साजन?

ना री गुलाब!

३०)

जब बहार बागों में आए।

कहीं दूर से मुझे बुलाए।

मिलने को मन होता बेकल।

क्या सखि साजन?

ना सखि कोयल!

harajaaee dil tod gayaa hai

mujhe be khataa chod gayaa hai

naheen bhool paataa usako man

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi bachapan!

·

27)

jab se usase preet lagaaee

thaame rahataa sadaa kalaaee

kshan bhar dheelaa kare n bandhan

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi, kangan!

·

28)

jab bhee maangoon usase pyaar

bedardee kar detaa waar

phir phir hotee mujhase bhool

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi shool!

·

29)

baagon men jab mujhase milataa

man mayoor ban sakhee! machalataa

dekh-dekh kar usakaa shabaab!

kyaa sakhi saajan?

naa ree gulaab!

·

30)

·

jab bahaar baagon men aae

kaheen door se mujhe bulaae

milane ko man hotaa bekal

kyaa sakhi saajan?

naa sakhi koyal!

हरजाई दिल तोड़ गया है।

मुझे बे खता छोड़ गया है।

नहीं भूल पाता उसको मन।

क्या सखि साजन?

ना सखि बचपन!

२७)

जब से उससे प्रीत लगाई।

थामे रहता सदा कलाई।

क्षण भर ढीला करे न बंधन।

क्या सखि साजन?

ना सखि, कंगन!

२८)

जब भी माँगूँ उससे प्यार।

बेदर्दी कर देता वार।

फिर फिर होती मुझसे भूल

क्या सखि साजन?

ना सखि शूल!

२९)

बागों में जब मुझसे मिलता।

मन मयूर बन सखी! मचलता।

देख-देख कर उसका शबाब!

क्या सखि साजन?

ना री गुलाब!

३०)

जब बहार बागों में आए।

कहीं दूर से मुझे बुलाए।

मिलने को मन होता बेकल।

क्या सखि साजन?

ना सखि कोयल!

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗