कहमुकरियाँ 36 से 40 kahamukariyaan 36 se 40 कहमुकरियाँ 36 से 40
हरजाई दिल तोड़ गया है।
मुझे बे खता छोड़ गया है।
नहीं भूल पाता उसको मन।
क्या सखि साजन?
ना सखि बचपन!
२७)
जब से उससे प्रीत लगाई।
थामे रहता सदा कलाई।
क्षण भर ढीला करे न बंधन।
क्या सखि साजन?
ना सखि, कंगन!
२८)
जब भी माँगूँ उससे प्यार।
बेदर्दी कर देता वार।
फिर फिर होती मुझसे भूल
क्या सखि साजन?
ना सखि शूल!
२९)
बागों में जब मुझसे मिलता।
मन मयूर बन सखी! मचलता।
देख-देख कर उसका शबाब!
क्या सखि साजन?
ना री गुलाब!
३०)
जब बहार बागों में आए।
कहीं दूर से मुझे बुलाए।
मिलने को मन होता बेकल।
क्या सखि साजन?
ना सखि कोयल!
harajaaee dil tod gayaa hai
mujhe be khataa chod gayaa hai
naheen bhool paataa usako man
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi bachapan!
27)
jab se usase preet lagaaee
thaame rahataa sadaa kalaaee
kshan bhar dheelaa kare n bandhan
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi, kangan!
28)
jab bhee maangoon usase pyaar
bedardee kar detaa waar
phir phir hotee mujhase bhool
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi shool!
29)
baagon men jab mujhase milataa
man mayoor ban sakhee! machalataa
dekh-dekh kar usakaa shabaab!
kyaa sakhi saajan?
naa ree gulaab!
30)
jab bahaar baagon men aae
kaheen door se mujhe bulaae
milane ko man hotaa bekal
kyaa sakhi saajan?
naa sakhi koyal!
हरजाई दिल तोड़ गया है।
मुझे बे खता छोड़ गया है।
नहीं भूल पाता उसको मन।
क्या सखि साजन?
ना सखि बचपन!
२७)
जब से उससे प्रीत लगाई।
थामे रहता सदा कलाई।
क्षण भर ढीला करे न बंधन।
क्या सखि साजन?
ना सखि, कंगन!
२८)
जब भी माँगूँ उससे प्यार।
बेदर्दी कर देता वार।
फिर फिर होती मुझसे भूल
क्या सखि साजन?
ना सखि शूल!
२९)
बागों में जब मुझसे मिलता।
मन मयूर बन सखी! मचलता।
देख-देख कर उसका शबाब!
क्या सखि साजन?
ना री गुलाब!
३०)
जब बहार बागों में आए।
कहीं दूर से मुझे बुलाए।
मिलने को मन होता बेकल।
क्या सखि साजन?
ना सखि कोयल!