कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कुण्डलिया Kundaliya कुंडलिया · रचना ४० / ६३ № 40 of 63 रचना ४० / ६३
१३ अक्तूबर २०१३ 13 October 2013 १३ अक्तूबर २०१३

विजया दशमी पर्व का wijayaa dashamee parv kaa विजया दशमी पर्व का

विजया दशमी पर्व का, अर्थ बहुत है गूढ।

॥

रावण के पुतले जला, खुश है मानव मूढ़।

॥

खुश है मानव मूढ़, मगर क्या हक है उसको

॥

क्या वह उससे श्रेष्ठ, जलाना चाहे जिसको?

॥

जिस दिन

होंगे ख़ाक, देश से

क्रूर कुकर्मी

॥

उस दिन होगी मीत, वास्तविक विजया दशमी।

॥

कई दशानन देश में, पनप रहे हैं आज।

॥

बालाएँ भयभीत हैं, फैला चौपट राज।

॥

फैला चौपट राज, बसी अंधेर नगरिया

॥

पनघट नहीं सुरक्ष,

wijayaa dashamee parv kaa, arth bahut hai goodh

·

raawan ke putale jalaa, khush hai maanaw mooढ़

·

khush hai maanaw mooढ़, magar kyaa hak hai usako

·

kyaa wah usase shreshth, jalaanaa chaahe jisako?

·

jis din

honge kaak, desh se

kroor kukarmee

·

us din hogee meet, waastawik wijayaa dashamee

·

kaee dashaanan desh men, panap rahe hain aaj

·

baalaaen bhayabheet hain, phailaa chaupat raaj

·

phailaa chaupat raaj, basee andher nagariyaa

·

panaghat naheen suraksh,

विजया दशमी पर्व का, अर्थ बहुत है गूढ।

॥

रावण के पुतले जला, खुश है मानव मूढ़।

॥

खुश है मानव मूढ़, मगर क्या हक है उसको

॥

क्या वह उससे श्रेष्ठ, जलाना चाहे जिसको?

॥

जिस दिन

होंगे ख़ाक, देश से

क्रूर कुकर्मी

॥

उस दिन होगी मीत, वास्तविक विजया दशमी।

॥

कई दशानन देश में, पनप रहे हैं आज।

॥

बालाएँ भयभीत हैं, फैला चौपट राज।

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फैला चौपट राज, बसी अंधेर नगरिया

॥

पनघट नहीं सुरक्ष,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗