विजया दशमी पर्व का wijayaa dashamee parv kaa विजया दशमी पर्व का
विजया दशमी पर्व का, अर्थ बहुत है गूढ।
रावण के पुतले जला, खुश है मानव मूढ़।
खुश है मानव मूढ़, मगर क्या हक है उसको
क्या वह उससे श्रेष्ठ, जलाना चाहे जिसको?
जिस दिन
होंगे ख़ाक, देश से
क्रूर कुकर्मी
उस दिन होगी मीत, वास्तविक विजया दशमी।
कई दशानन देश में, पनप रहे हैं आज।
बालाएँ भयभीत हैं, फैला चौपट राज।
फैला चौपट राज, बसी अंधेर नगरिया
पनघट नहीं सुरक्ष,
wijayaa dashamee parv kaa, arth bahut hai goodh
raawan ke putale jalaa, khush hai maanaw mooढ़
khush hai maanaw mooढ़, magar kyaa hak hai usako
kyaa wah usase shreshth, jalaanaa chaahe jisako?
jis din
honge kaak, desh se
kroor kukarmee
us din hogee meet, waastawik wijayaa dashamee
kaee dashaanan desh men, panap rahe hain aaj
baalaaen bhayabheet hain, phailaa chaupat raaj
phailaa chaupat raaj, basee andher nagariyaa
panaghat naheen suraksh,
विजया दशमी पर्व का, अर्थ बहुत है गूढ।
रावण के पुतले जला, खुश है मानव मूढ़।
खुश है मानव मूढ़, मगर क्या हक है उसको
क्या वह उससे श्रेष्ठ, जलाना चाहे जिसको?
जिस दिन
होंगे ख़ाक, देश से
क्रूर कुकर्मी
उस दिन होगी मीत, वास्तविक विजया दशमी।
कई दशानन देश में, पनप रहे हैं आज।
बालाएँ भयभीत हैं, फैला चौपट राज।
फैला चौपट राज, बसी अंधेर नगरिया
पनघट नहीं सुरक्ष,