रामजी भारत की भू पर raamajee bhaarat kee bhoo par रामजी भारत की भू पर
रामजी, भारत की भू पर, फिर से आओ एक बार।
रोग दोषों को पुनः, जड़ से मिटाओ एक बार।
फन उठाए फिर रहे हैं, नाग विषधर देश में
विष बने अमृत कुछ ऐसा, शर चलाओ एक बार।
जो मुखौटे ओढ़ फिरते हैं, तुम्हारे नाम के
मन में उनके ‘राम’ अंकित, कर दिखाओ एक बार
पापियों के पाप से, मैली हुई मन्दाकिनी
धनुर्धारी! धार सलिला, की बचाओ एक बार।
भूल बैठीं, त्याग तप को, आजकल की नारियाँ
याद सीता की उन्हें, फिर से दिलाओ एक बार।
सुत हुए साहब विदेशी ,घर में वनवासी पिता
सर्व व्यापी, फिर चमन, वन को बनाओ एक बार।
वेद की गूँजें ऋचाएँ, यज्ञ हों पावन जहाँ
वो अयोध्या सत्य की, फिर से बसाओ एक बार।
-कल्पना रामानीप्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
raamajee, bhaarat kee bhoo par, phir se aao ek baar
rog doshon ko punah, jad se mitaao ek baar
phan uthaae phir rahe hain, naag wishadhar desh men
wish bane amriit kuch aisaa, shar chalaao ek baar
jo mukhaute oढ़ phirate hain, tumhaare naam ke
man men unake ‘raam’ ankit, kar dikhaao ek baar
paapiyon ke paap se, mailee huee mandaakinee
dhanurdhaaree! dhaar salilaa, kee bachaao ek baar
bhool baitheen, tyaag tap ko, aajakal kee naariyaan
yaad seetaa kee unhen, phir se dilaao ek baar
sut hue saahab wideshee ,ghar men wanawaasee pitaa
sarv wyaapee, phir chaman, wan ko banaao ek baar
wed kee goonjen riichaaen, yajn hon paawan jahaan
wo ayodhyaa saty kee, phir se basaao ek baar
-kalpanaa raamaaneeprotsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
रामजी, भारत की भू पर, फिर से आओ एक बार।
रोग दोषों को पुनः, जड़ से मिटाओ एक बार।
फन उठाए फिर रहे हैं, नाग विषधर देश में
विष बने अमृत कुछ ऐसा, शर चलाओ एक बार।
जो मुखौटे ओढ़ फिरते हैं, तुम्हारे नाम के
मन में उनके ‘राम’ अंकित, कर दिखाओ एक बार
पापियों के पाप से, मैली हुई मन्दाकिनी
धनुर्धारी! धार सलिला, की बचाओ एक बार।
भूल बैठीं, त्याग तप को, आजकल की नारियाँ
याद सीता की उन्हें, फिर से दिलाओ एक बार।
सुत हुए साहब विदेशी ,घर में वनवासी पिता
सर्व व्यापी, फिर चमन, वन को बनाओ एक बार।
वेद की गूँजें ऋचाएँ, यज्ञ हों पावन जहाँ
वो अयोध्या सत्य की, फिर से बसाओ एक बार।
-कल्पना रामानीप्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
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-कल्पना रामानी