कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १०७ / १६३ № 107 of 163 रचना १०७ / १६३
१६ मार्च २०१५ 16 March 2015 १६ मार्च २०१५

रधिया ने नवगीत रचा radhiyaa ne nawageet rachaa रधिया ने नवगीत रचा

दिनचर्या के गुणा-भाग

से

रधिया ने नवगीत

रचा।

जाग, जगा प्रातः तारे को

प्रथम सँभाली कर्म-कलम

भरी विचारों की

स्याही

चल पड़ी उठा लयबद्ध

कदम

लेखा-जोखा घर-घर का

था

रहा हृदय में

द्वंद्व

मचा।

श्रम बूँदों के रहे

बिगड़ते-

बनते चित्र कवित्त

भरे

अक्षर-अक्षर रही

जोड़ती

रधिया रानी धीर धरे

धार-धार धुलते

भांडों पर

दो हाथों को नचा-

नचा।

ढला दिवस, खींची लकीर

पर

dinacharyaa ke gunaa-bhaag

se

·

radhiyaa ne nawageet

·

rachaa

·

jaag, jagaa praatah taare ko

·

pratham sanbhaalee karm-kalam

·

bharee wichaaron kee

syaahee

·

chal padee uthaa layabaddh

kadam

·

lekhaa-jokhaa ghar-ghar kaa

thaa

·

rahaa hriiday men

dvandv

·

machaa

·

shram boondon ke rahe

bigadate-

·

banate chitr kawitt

bhare

·

akshar-akshar rahee

jodatee

·

radhiyaa raanee dheer dhare

·

dhaar-dhaar dhulate

bhaandon par

·

do haathon ko nachaa-

·

nachaa

·

dhalaa diwas, kheenchee lakeer

·

par

दिनचर्या के गुणा-भाग

से

रधिया ने नवगीत

रचा।

जाग, जगा प्रातः तारे को

प्रथम सँभाली कर्म-कलम

भरी विचारों की

स्याही

चल पड़ी उठा लयबद्ध

कदम

लेखा-जोखा घर-घर का

था

रहा हृदय में

द्वंद्व

मचा।

श्रम बूँदों के रहे

बिगड़ते-

बनते चित्र कवित्त

भरे

अक्षर-अक्षर रही

जोड़ती

रधिया रानी धीर धरे

धार-धार धुलते

भांडों पर

दो हाथों को नचा-

नचा।

ढला दिवस, खींची लकीर

पर

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗