कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७८ / २०४ № 78 of 204 रचना ७८ / २०४
२३ मार्च २०१५ 23 March 2015 २३ मार्च २०१५

पसीने से जब-जब नहाती है गर्मी paseene se jab-jab nahaatee hai garmee पसीने से जब-जब नहाती है गर्मी

पसीने

से जब-जब नहाती है गर्मी

हवाओं

से हमको मिलाती है गर्मी

उगे-भोर, चिड़िया

बनी चहचहाती

चमन

की तरफ लेके जाती है गर्मी

पकड़

हाथ चलती है फुलवारियों में

झकोरों

से झूला झुलाती है गर्मी

छतों

पर सितारों की छाया में शब भर

सरस

रागिनी गा सुलाती है गर्मी

विजन

वन में पेड़ों की बन छाँव सुखकर

महक

के गलीचे बिछाती है गर्मी

अगम

झील में, ताल में, नाव खेकर

धवल

धार-जल में घुमाती है गर्मी

पहाड़ों

पे, फूलों-भरी वादियों में

हमें

देके न्यौता बुलाती है गर्मी

पिला

जूस, लस्सी या नींबू शिकंजी

तपन

की चुभन से बचाती है गर्मी

डरें

‘कल्पना’ क्यों भला गर्मियों से

कि राहत भी लेकर ही आती

है गर्मी

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

paseene

se jab-jab nahaatee hai garmee

·

hawaaon

se hamako milaatee hai garmee

·

uge-bhor, chidiyaa

banee chahachahaatee

·

chaman

kee taraph leke jaatee hai garmee

·

pakad

haath chalatee hai phulawaariyon men

·

jhakoron

se jhoolaa jhulaatee hai garmee

·

chaton

par sitaaron kee chaayaa men shab bhar

·

saras

raaginee gaa sulaatee hai garmee

·

wijan

wan men pedon kee ban chaanv sukhakar

·

mahak

ke galeeche bichaatee hai garmee

·

agam

jheel men, taal men, naaw khekar

·

dhawal

dhaar-jal men ghumaatee hai garmee

·

pahaadon

pe, phoolon-bharee waadiyon men

·

hamen

deke nyautaa bulaatee hai garmee

·

pilaa

joos, lassee yaa neenboo shikanjee

·

tapan

kee chubhan se bachaatee hai garmee

·

daren

‘kalpanaa’ kyon bhalaa garmiyon se

·

ki raahat bhee lekar hee aatee

hai garmee

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

पसीने

से जब-जब नहाती है गर्मी

हवाओं

से हमको मिलाती है गर्मी

उगे-भोर, चिड़िया

बनी चहचहाती

चमन

की तरफ लेके जाती है गर्मी

पकड़

हाथ चलती है फुलवारियों में

झकोरों

से झूला झुलाती है गर्मी

छतों

पर सितारों की छाया में शब भर

सरस

रागिनी गा सुलाती है गर्मी

विजन

वन में पेड़ों की बन छाँव सुखकर

महक

के गलीचे बिछाती है गर्मी

अगम

झील में, ताल में, नाव खेकर

धवल

धार-जल में घुमाती है गर्मी

पहाड़ों

पे, फूलों-भरी वादियों में

हमें

देके न्यौता बुलाती है गर्मी

पिला

जूस, लस्सी या नींबू शिकंजी

तपन

की चुभन से बचाती है गर्मी

डरें

‘कल्पना’ क्यों भला गर्मियों से

कि राहत भी लेकर ही आती

है गर्मी

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗