बेटियाँ होंगी न जब/ग़ज़ल betiyaan hongee n jab/gazal बेटियाँ होंगी न जब/ग़ज़ल
गर्भ में ही काटकर
अपनी सुता की नाल माँ!
दुग्ध-भीगा शुभ्र आँचल
मत करो तुम लाल माँ!
तुम दया ममता की देवी
तुम दुआ संतान की
जन्म दो जननी! न बनना
ढोंगियों की ढाल माँ!
मैं तो हूँ बुलबुल तुम्हारे
प्रेम के ही बाग की
चाहती हूँ एक छोटी सी
सुरक्षित डाल माँ!
पुत्र की चाहत में तुम
अपमान निज करती हो क्यों?
धारिणी जागो! समझ लो
भेड़ियों की चाल माँ!
सिर उठाएँ जो असुर
उनको सिखाना वो सबक
भूल जाएँ कंस कातिल
आसुरी सुर ताल माँ!
तुम सबल हो, आज यह
साबित करो नव-शक्ति बन
कर न पाएँ कापुरुष ज्यों
मेरा बाँका बाल माँ!
ठान लेना जीतनी है
जंग ये हर हाल में
खंग बनकर काट देना
हार का हर जाल माँ!
तान चलना माथ, नन्हाँ
हाथ मेरा थामकर
दर्प से दमका करे ज्यों
भारती का भाल माँ!
“कल्पना” अंजाम सोचो
बेटियाँ होंगी न जब
रूप कितना सृष्टि का
हो जाएगा विकराल माँ!
garbh men hee kaatakar
apanee sutaa kee naal maan!
dugdh-bheegaa shubhr aanchal
mat karo tum laal maan!
tum dayaa mamataa kee dewee
tum duaa santaan kee
janm do jananee! n bananaa
dhongiyon kee dhaal maan!
main to hoon bulabul tumhaare
prem ke hee baag kee
chaahatee hoon ek chotee see
surakshit daal maan!
putr kee chaahat men tum
apamaan nij karatee ho kyon?
dhaarinee jaago! samajh lo
bhediyon kee chaal maan!
sir uthaaen jo asur
unako sikhaanaa wo sabak
bhool jaaen kans kaatil
aasuree sur taal maan!
tum sabal ho, aaj yah
saabit karo naw-shakti ban
kar n paaen kaapurush jyon
meraa baankaa baal maan!
thaan lenaa jeetanee hai
jang ye har haal men
khang banakar kaat denaa
haar kaa har jaal maan!
taan chalanaa maath, nanhaan
haath meraa thaamakar
darp se damakaa kare jyon
bhaaratee kaa bhaal maan!
“kalpanaa” anjaam socho
betiyaan hongee n jab
roop kitanaa sriishti kaa
ho jaaegaa wikaraal maan!
गर्भ में ही काटकर
अपनी सुता की नाल माँ!
दुग्ध-भीगा शुभ्र आँचल
मत करो तुम लाल माँ!
तुम दया ममता की देवी
तुम दुआ संतान की
जन्म दो जननी! न बनना
ढोंगियों की ढाल माँ!
मैं तो हूँ बुलबुल तुम्हारे
प्रेम के ही बाग की
चाहती हूँ एक छोटी सी
सुरक्षित डाल माँ!
पुत्र की चाहत में तुम
अपमान निज करती हो क्यों?
धारिणी जागो! समझ लो
भेड़ियों की चाल माँ!
सिर उठाएँ जो असुर
उनको सिखाना वो सबक
भूल जाएँ कंस कातिल
आसुरी सुर ताल माँ!
तुम सबल हो, आज यह
साबित करो नव-शक्ति बन
कर न पाएँ कापुरुष ज्यों
मेरा बाँका बाल माँ!
ठान लेना जीतनी है
जंग ये हर हाल में
खंग बनकर काट देना
हार का हर जाल माँ!
तान चलना माथ, नन्हाँ
हाथ मेरा थामकर
दर्प से दमका करे ज्यों
भारती का भाल माँ!
“कल्पना” अंजाम सोचो
बेटियाँ होंगी न जब
रूप कितना सृष्टि का
हो जाएगा विकराल माँ!