कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १५० / २०५ № 150 of 205 रचना १५० / २०५
८ जुलाई २०१७ 8 July 2017 ८ जुलाई २०१७

बेटियाँ होंगी न जब/ग़ज़ल betiyaan hongee n jab/gazal बेटियाँ होंगी न जब/ग़ज़ल

गर्भ में ही काटकर

अपनी सुता की नाल माँ!

दुग्ध-भीगा शुभ्र आँचल

मत करो तुम लाल माँ!

॥

तुम दया ममता की देवी

तुम दुआ संतान की

जन्म दो जननी! न बनना

ढोंगियों की ढाल माँ!

॥

मैं तो हूँ बुलबुल तुम्हारे

प्रेम के ही बाग की

चाहती हूँ एक छोटी सी

सुरक्षित डाल माँ!

॥

पुत्र की चाहत में तुम

अपमान निज करती हो क्यों?

धारिणी जागो! समझ लो

भेड़ियों की चाल माँ!

॥

सिर उठाएँ जो असुर

उनको सिखाना वो सबक

भूल जाएँ कंस कातिल

आसुरी सुर ताल माँ!

॥

तुम सबल हो, आज यह

साबित करो नव-शक्ति बन

कर न पाएँ कापुरुष ज्यों

मेरा बाँका बाल माँ!

॥

ठान लेना जीतनी है

जंग ये हर हाल में

खंग बनकर काट देना

हार का हर जाल माँ!

॥

तान चलना माथ, नन्हाँ

हाथ मेरा थामकर

दर्प से दमका करे ज्यों

भारती का भाल माँ!

॥

“कल्पना” अंजाम सोचो

बेटियाँ होंगी न जब

रूप कितना सृष्टि का

हो जाएगा विकराल माँ!

garbh men hee kaatakar

apanee sutaa kee naal maan!

dugdh-bheegaa shubhr aanchal

mat karo tum laal maan!

·

tum dayaa mamataa kee dewee

tum duaa santaan kee

janm do jananee! n bananaa

dhongiyon kee dhaal maan!

·

main to hoon bulabul tumhaare

prem ke hee baag kee

chaahatee hoon ek chotee see

surakshit daal maan!

·

putr kee chaahat men tum

apamaan nij karatee ho kyon?

dhaarinee jaago! samajh lo

bhediyon kee chaal maan!

·

sir uthaaen jo asur

unako sikhaanaa wo sabak

bhool jaaen kans kaatil

aasuree sur taal maan!

·

tum sabal ho, aaj yah

saabit karo naw-shakti ban

kar n paaen kaapurush jyon

meraa baankaa baal maan!

·

thaan lenaa jeetanee hai

jang ye har haal men

khang banakar kaat denaa

haar kaa har jaal maan!

·

taan chalanaa maath, nanhaan

haath meraa thaamakar

darp se damakaa kare jyon

bhaaratee kaa bhaal maan!

·

“kalpanaa” anjaam socho

betiyaan hongee n jab

roop kitanaa sriishti kaa

ho jaaegaa wikaraal maan!

गर्भ में ही काटकर

अपनी सुता की नाल माँ!

दुग्ध-भीगा शुभ्र आँचल

मत करो तुम लाल माँ!

॥

तुम दया ममता की देवी

तुम दुआ संतान की

जन्म दो जननी! न बनना

ढोंगियों की ढाल माँ!

॥

मैं तो हूँ बुलबुल तुम्हारे

प्रेम के ही बाग की

चाहती हूँ एक छोटी सी

सुरक्षित डाल माँ!

॥

पुत्र की चाहत में तुम

अपमान निज करती हो क्यों?

धारिणी जागो! समझ लो

भेड़ियों की चाल माँ!

॥

सिर उठाएँ जो असुर

उनको सिखाना वो सबक

भूल जाएँ कंस कातिल

आसुरी सुर ताल माँ!

॥

तुम सबल हो, आज यह

साबित करो नव-शक्ति बन

कर न पाएँ कापुरुष ज्यों

मेरा बाँका बाल माँ!

॥

ठान लेना जीतनी है

जंग ये हर हाल में

खंग बनकर काट देना

हार का हर जाल माँ!

॥

तान चलना माथ, नन्हाँ

हाथ मेरा थामकर

दर्प से दमका करे ज्यों

भारती का भाल माँ!

॥

“कल्पना” अंजाम सोचो

बेटियाँ होंगी न जब

रूप कितना सृष्टि का

हो जाएगा विकराल माँ!

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗