कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १४९ / २०४ № 149 of 204 रचना १४९ / २०४
८ जुलाई २०१७ 8 July 2017 ८ जुलाई २०१७

बेटियाँ होंगी न जब/ग़ज़ल betiyaan hongee n jab/gazal बेटियाँ होंगी न जब/ग़ज़ल

गर्भ में ही काटकर

अपनी सुता की नाल माँ!

दुग्ध-भीगा शुभ्र आँचल

मत करो तुम लाल माँ!

तुम दया ममता की देवी

तुम दुआ संतान की

जन्म दो जननी! न बनना

ढोंगियों की ढाल माँ!

मैं तो हूँ बुलबुल तुम्हारे

प्रेम के ही बाग की

चाहती हूँ एक छोटी सी

सुरक्षित डाल माँ!

पुत्र की चाहत में तुम

अपमान निज करती हो क्यों?

धारिणी जागो! समझ लो

भेड़ियों की चाल माँ!

सिर उठाएँ जो असुर

उनको सिखाना वो सबक

भूल जाएँ कंस कातिल

आसुरी सुर ताल माँ!

तुम सबल हो, आज यह

साबित करो नव-शक्ति बन

कर न पाएँ कापुरुष ज्यों

मेरा बाँका बाल माँ!

ठान लेना जीतनी है

जंग ये हर हाल में

खंग बनकर काट देना

हार का हर जाल माँ!

तान चलना माथ, नन्हाँ

हाथ मेरा थामकर

दर्प से दमका करे ज्यों

भारती का भाल माँ!

“कल्पना” अंजाम सोचो

बेटियाँ होंगी न जब

रूप कितना सृष्टि का

हो जाएगा विकराल माँ!

garbh men hee kaatakar

apanee sutaa kee naal maan!

dugdh-bheegaa shubhr aanchal

mat karo tum laal maan!

·

tum dayaa mamataa kee dewee

tum duaa santaan kee

janm do jananee! n bananaa

dhongiyon kee dhaal maan!

·

main to hoon bulabul tumhaare

prem ke hee baag kee

chaahatee hoon ek chotee see

surakshit daal maan!

·

putr kee chaahat men tum

apamaan nij karatee ho kyon?

dhaarinee jaago! samajh lo

bhediyon kee chaal maan!

·

sir uthaaen jo asur

unako sikhaanaa wo sabak

bhool jaaen kans kaatil

aasuree sur taal maan!

·

tum sabal ho, aaj yah

saabit karo naw-shakti ban

kar n paaen kaapurush jyon

meraa baankaa baal maan!

·

thaan lenaa jeetanee hai

jang ye har haal men

khang banakar kaat denaa

haar kaa har jaal maan!

·

taan chalanaa maath, nanhaan

haath meraa thaamakar

darp se damakaa kare jyon

bhaaratee kaa bhaal maan!

·

“kalpanaa” anjaam socho

betiyaan hongee n jab

roop kitanaa sriishti kaa

ho jaaegaa wikaraal maan!

गर्भ में ही काटकर

अपनी सुता की नाल माँ!

दुग्ध-भीगा शुभ्र आँचल

मत करो तुम लाल माँ!

तुम दया ममता की देवी

तुम दुआ संतान की

जन्म दो जननी! न बनना

ढोंगियों की ढाल माँ!

मैं तो हूँ बुलबुल तुम्हारे

प्रेम के ही बाग की

चाहती हूँ एक छोटी सी

सुरक्षित डाल माँ!

पुत्र की चाहत में तुम

अपमान निज करती हो क्यों?

धारिणी जागो! समझ लो

भेड़ियों की चाल माँ!

सिर उठाएँ जो असुर

उनको सिखाना वो सबक

भूल जाएँ कंस कातिल

आसुरी सुर ताल माँ!

तुम सबल हो, आज यह

साबित करो नव-शक्ति बन

कर न पाएँ कापुरुष ज्यों

मेरा बाँका बाल माँ!

ठान लेना जीतनी है

जंग ये हर हाल में

खंग बनकर काट देना

हार का हर जाल माँ!

तान चलना माथ, नन्हाँ

हाथ मेरा थामकर

दर्प से दमका करे ज्यों

भारती का भाल माँ!

“कल्पना” अंजाम सोचो

बेटियाँ होंगी न जब

रूप कितना सृष्टि का

हो जाएगा विकराल माँ!

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗