कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७७ / २०४ № 77 of 204 रचना ७७ / २०४
१५ मार्च २०१५ 15 March 2015 १५ मार्च २०१५

खुदा से खुशी की लहर माँगती हूँ khudaa se khushee kee lahar maangatee hoon खुदा से खुशी की लहर माँगती हूँ

खुदा

से खुशी की लहर माँगती हूँ।

कि

बेखौफ हर एक घर माँगती हूँ।

अँधेरों

ने ही जिनसे नज़रें मिलाईं

उजालों

की उनपर नज़र माँगती हूँ।

जो

लाए नए रंग जीवन में सबके

वे

दिन, रात, पल, हर पहर माँगती हूँ।

जो

पिंजड़ों में सैय्याद,

के कैद हैं, उन

परिंदों

के आज़ाद, पर माँगती हूँ।

है

परलोक क्या ये,

नहीं जानती मैं

इसी

लोक की सुख-सहर माँगती हूँ।

करे

कातिलों के, क़तल काफिले जो

वो

कानून होकर, निडर माँगती हूँ।

दिलों

को मिलाकर, मिले जन से जाके

हरिक

गाँव में, वो शहर माँगती हूँ।

बहे

रस की धारा, मेरी हर गज़ल से

कुछ

ऐसी कलम से, बहर माँगती हूँ।

करूँ

जन की सेवा, जिऊँ जग की खातिर

हे

रब! ‘कल्पना’ वो हुनर माँगती हूँ।

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

khudaa

se khushee kee lahar maangatee hoon

·

ki

bekhauph har ek ghar maangatee hoon

·

andheron

ne hee jinase nazaren milaaeen

·

ujaalon

kee unapar nazar maangatee hoon

·

jo

laae nae rang jeewan men sabake

·

we

din, raat, pal, har pahar maangatee hoon

·

jo

pinjadon men saiyyaad,

ke kaid hain, un

·

parindon

ke aazaad, par maangatee hoon

·

hai

paralok kyaa ye,

naheen jaanatee main

·

isee

lok kee sukh-sahar maangatee hoon

·

kare

kaatilon ke, qatal kaaphile jo

·

wo

kaanoon hokar, nidar maangatee hoon

·

dilon

ko milaakar, mile jan se jaake

·

harik

gaanv men, wo shahar maangatee hoon

·

bahe

ras kee dhaaraa, meree har gazal se

·

kuch

aisee kalam se, bahar maangatee hoon

·

karoon

jan kee sewaa, jioon jag kee khaatir

·

he

rab! ‘kalpanaa’ wo hunar maangatee hoon

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

खुदा

से खुशी की लहर माँगती हूँ।

कि

बेखौफ हर एक घर माँगती हूँ।

अँधेरों

ने ही जिनसे नज़रें मिलाईं

उजालों

की उनपर नज़र माँगती हूँ।

जो

लाए नए रंग जीवन में सबके

वे

दिन, रात, पल, हर पहर माँगती हूँ।

जो

पिंजड़ों में सैय्याद,

के कैद हैं, उन

परिंदों

के आज़ाद, पर माँगती हूँ।

है

परलोक क्या ये,

नहीं जानती मैं

इसी

लोक की सुख-सहर माँगती हूँ।

करे

कातिलों के, क़तल काफिले जो

वो

कानून होकर, निडर माँगती हूँ।

दिलों

को मिलाकर, मिले जन से जाके

हरिक

गाँव में, वो शहर माँगती हूँ।

बहे

रस की धारा, मेरी हर गज़ल से

कुछ

ऐसी कलम से, बहर माँगती हूँ।

करूँ

जन की सेवा, जिऊँ जग की खातिर

हे

रब! ‘कल्पना’ वो हुनर माँगती हूँ।

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗