कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ४६ / ११४ № 46 of 114 रचना ४६ / ११४
२ अप्रैल २०१७ 2 April 2017 २ अप्रैल २०१७

निरुत्तर /लघुकथा niruttar /laghukathaa निरुत्तर /लघुकथा

उस

घुमावदार गुफानुमा बाजार से तगड़ी खरीदारी करने के बाद पसीने से लथपथ होतीं सुधा और

सुरुचि बेहद थक चुकी थीं. प्यास से बेहाल होकर बाहर आकर इधर उधर नज़र दौड़ाई तो

आसपास कोई होटल नज़र नहीं आया, न ही उनमें ढूँढने की शक्ति बाकी थी लेकिन सड़क के उस

पार छाया में एक कतार में कुछ ठेलागाड़ियाँ देखकर गला तर करने की उम्मीद लिए फुर्ती

से उधर पहुँच गईं. नींबू-पानी, जल-जीरा, लस्सी आदि ठन्डे पेय

us

ghumaawadaar guphaanumaa baajaar se tagadee khareedaaree karane ke baad paseene se lathapath hoteen sudhaa aur

suruchi behad thak chukee theen pyaas se behaal hokar baahar aakar idhar udhar nazar daudaaee to

aasapaas koee hotal nazar naheen aayaa, n hee unamen dhoondhane kee shakti baakee thee lekin sadak ke us

paar chaayaa men ek kataar men kuch thelaagaadiyaan dekhakar galaa tar karane kee ummeed lie phurtee

se udhar pahunch gaeen neenboo-paanee, jal-jeeraa, lassee aadi thande pey

उस

घुमावदार गुफानुमा बाजार से तगड़ी खरीदारी करने के बाद पसीने से लथपथ होतीं सुधा और

सुरुचि बेहद थक चुकी थीं. प्यास से बेहाल होकर बाहर आकर इधर उधर नज़र दौड़ाई तो

आसपास कोई होटल नज़र नहीं आया, न ही उनमें ढूँढने की शक्ति बाकी थी लेकिन सड़क के उस

पार छाया में एक कतार में कुछ ठेलागाड़ियाँ देखकर गला तर करने की उम्मीद लिए फुर्ती

से उधर पहुँच गईं. नींबू-पानी, जल-जीरा, लस्सी आदि ठन्डे पेय

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗