कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ४२ / ५२ № 42 of 52 रचना ४२ / ५२
१८ सितम्बर २०१६ 18 September 2016 १८ सितम्बर २०१६

घुमण जी आ वेला ghuman jee aa welaa घुमण जी आ वेला

खुली

अखि दिठो मूँ, दिसे प्यो सितारो

॥

असुर

जो दरीअ खाँ, सदे प्यो

सितारो

॥

घुमण

जी आ वेला, विहाणो छदे

दे

॥

उथी

बाग में हलु, चवे प्यो सितारो

॥

धिके

हंधु परिते हल्या पेर मुहिंजा

॥

त

गदु मूँसाँ हू पिणि हले प्यो सितारो

॥

बगीचे

अँदरि प्राण दींदड़ि हवा में

॥

पखिनि

साँ बि गाल्हियूँ करे प्यो सितारो

॥

ट्रिड़णु

गुल-कलिनि जो ऐं झिरकिनि जो गाइणु

॥

निहारे

खुशीअ साँ ट्रिड़े प्यो सितारो

॥

सुबुह

थ्यो,

khulee

akhi ditho moon, dise pyo sitaaro

·

asur

jo dareea khaan, sade pyo

sitaaro

·

ghuman

jee aa welaa, wihaano chade

de

·

uthee

baag men halu, chawe pyo sitaaro

·

dhike

handhu parite halyaa per muhinjaa

·

t

gadu moonsaan hoo pini hale pyo sitaaro

·

bageeche

andari praan deendadi hawaa men

·

pakhini

saan bi gaalhiyoon kare pyo sitaaro

·

tridanu

gul-kalini jo ain jhirakini jo gaainu

·

nihaare

khusheea saan tride pyo sitaaro

·

subuh

thyo,

खुली

अखि दिठो मूँ, दिसे प्यो सितारो

॥

असुर

जो दरीअ खाँ, सदे प्यो

सितारो

॥

घुमण

जी आ वेला, विहाणो छदे

दे

॥

उथी

बाग में हलु, चवे प्यो सितारो

॥

धिके

हंधु परिते हल्या पेर मुहिंजा

॥

त

गदु मूँसाँ हू पिणि हले प्यो सितारो

॥

बगीचे

अँदरि प्राण दींदड़ि हवा में

॥

पखिनि

साँ बि गाल्हियूँ करे प्यो सितारो

॥

ट्रिड़णु

गुल-कलिनि जो ऐं झिरकिनि जो गाइणु

॥

निहारे

खुशीअ साँ ट्रिड़े प्यो सितारो

॥

सुबुह

थ्यो,

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗