कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६ / १६३ № 6 of 163 रचना ६ / १६३
१३ दिसम्बर २०१२ 13 December 2012 १३ दिसम्बर २०१२

हमारा गाँव hamaaraa gaanv हमारा गाँव

ऊँची नीची पगडंडी परचलते जाते पाँवयही हमारा गाँव।

पनघट पर सखियों की टोलीनयन इशारे, हँसी ठिठोली।सिर पर आँचल, कमर गगरियागजब ढा रही लाल चुनरिया।पायल की झंकार सुनातेमेहँदी वाले पाँव।

सजे बाग, महकी अमराईकुहू कुहू कोयल की छाई।बरगद की छाया में झूलेपथिक देखकर रस्ता भूले।चुग्गा चुगती नन्ही चिड़ियाकौवा बोले काँव।

भोर भए पूजा सूरज कीपरिक्रमा पावन पीपल की।नैसर्गिक सौंदर्य गाँव मेंरिश्तों का

oonchee neechee pagadandee parachalate jaate paanvayahee hamaaraa gaanv

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panaghat par sakhiyon kee toleenayan ishaare, hansee thitholeesir par aanchal, kamar gagariyaagajab dhaa rahee laal chunariyaapaayal kee jhankaar sunaatemehandee waale paanv

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saje baag, mahakee amaraaeekuhoo kuhoo koyal kee chaaeebaragad kee chaayaa men jhoolepathik dekhakar rastaa bhoolechuggaa chugatee nanhee chidiyaakauwaa bole kaanv

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bhor bhae poojaa sooraj keeparikramaa paawan peepal keenaisargik saundary gaanv menrishton kaa

ऊँची नीची पगडंडी परचलते जाते पाँवयही हमारा गाँव।

पनघट पर सखियों की टोलीनयन इशारे, हँसी ठिठोली।सिर पर आँचल, कमर गगरियागजब ढा रही लाल चुनरिया।पायल की झंकार सुनातेमेहँदी वाले पाँव।

सजे बाग, महकी अमराईकुहू कुहू कोयल की छाई।बरगद की छाया में झूलेपथिक देखकर रस्ता भूले।चुग्गा चुगती नन्ही चिड़ियाकौवा बोले काँव।

भोर भए पूजा सूरज कीपरिक्रमा पावन पीपल की।नैसर्गिक सौंदर्य गाँव मेंरिश्तों का

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗