कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ६ / १६४ № 6 of 164 रचना ६ / १६४
१३ दिसम्बर २०१२ 13 December 2012 १३ दिसम्बर २०१२

हमारा गाँव hamaaraa gaanv हमारा गाँव

ऊँची नीची पगडंडी परचलते जाते पाँवयही हमारा गाँव।

॥

पनघट पर सखियों की टोलीनयन इशारे, हँसी ठिठोली।सिर पर आँचल, कमर गगरियागजब ढा रही लाल चुनरिया।पायल की झंकार सुनातेमेहँदी वाले पाँव।

॥

सजे बाग, महकी अमराईकुहू कुहू कोयल की छाई।बरगद की छाया में झूलेपथिक देखकर रस्ता भूले।चुग्गा चुगती नन्ही चिड़ियाकौवा बोले काँव।

॥

भोर भए पूजा सूरज कीपरिक्रमा पावन पीपल की।नैसर्गिक सौंदर्य गाँव मेंरिश्तों का

oonchee neechee pagadandee parachalate jaate paanvayahee hamaaraa gaanv

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panaghat par sakhiyon kee toleenayan ishaare, hansee thitholeesir par aanchal, kamar gagariyaagajab dhaa rahee laal chunariyaapaayal kee jhankaar sunaatemehandee waale paanv

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saje baag, mahakee amaraaeekuhoo kuhoo koyal kee chaaeebaragad kee chaayaa men jhoolepathik dekhakar rastaa bhoolechuggaa chugatee nanhee chidiyaakauwaa bole kaanv

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bhor bhae poojaa sooraj keeparikramaa paawan peepal keenaisargik saundary gaanv menrishton kaa

ऊँची नीची पगडंडी परचलते जाते पाँवयही हमारा गाँव।

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पनघट पर सखियों की टोलीनयन इशारे, हँसी ठिठोली।सिर पर आँचल, कमर गगरियागजब ढा रही लाल चुनरिया।पायल की झंकार सुनातेमेहँदी वाले पाँव।

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सजे बाग, महकी अमराईकुहू कुहू कोयल की छाई।बरगद की छाया में झूलेपथिक देखकर रस्ता भूले।चुग्गा चुगती नन्ही चिड़ियाकौवा बोले काँव।

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भोर भए पूजा सूरज कीपरिक्रमा पावन पीपल की।नैसर्गिक सौंदर्य गाँव मेंरिश्तों का

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗