कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५१ / १६३ № 151 of 163 रचना १५१ / १६३
१३ दिसम्बर २०१९ 13 December 2019 १३ दिसम्बर २०१९

फुटपाथों से phutapaathon se फुटपाथों से

जिनसे जुड़तीं कई इमारतें

जुड़े हुए फुटपाथों से।

ये मजदूर निरे मतवाले

यहाँ वहाँ हैं डेरा डाले।

कुछ रुपयों की मिले दिहाड़ी

जुट जाते हैं चंद निवाले।

दिन भर बोझ तगारी ढोते

चैन जुड़ा है रातों से

क्या किस्मत दीनों ने पाई

गिरें पड़ें तो राम दुहाई।

साँसें बंधक  मरते दम तक

दौलत से तुलती भरपाई।

शोषण से शोणित का रिश्ता

गठबंधन है घातों से।

जंग लगे शासन के पुर्जे

अंधा है कानून नकारा।

न्याय दलीलों के दर दाखिल

बेकसूर हर बाज़ी हारा।

फिट करते सब अपनी गोटी

फुरसत किसे बिसातों से।

jinase judateen kaee imaaraten

jude hue phutapaathon se

·

ye majadoor nire matawaale

yahaan wahaan hain deraa daale

kuch rupayon kee mile dihaadee

jut jaate hain chand niwaale

·

din bhar bojh tagaaree dhote

chain judaa hai raaton se

·

kyaa kismat deenon ne paaee

giren paden to raam duhaaee

saansen bandhak marate dam tak

daulat se tulatee bharapaaee

·

shoshan se shonit kaa rishtaa

gathabandhan hai ghaaton se

·

jang lage shaasan ke purje

andhaa hai kaanoon nakaaraa

nyaay daleelon ke dar daakhil

bekasoor har baazee haaraa

·

phit karate sab apanee gotee

phurasat kise bisaaton se

जिनसे जुड़तीं कई इमारतें

जुड़े हुए फुटपाथों से।

ये मजदूर निरे मतवाले

यहाँ वहाँ हैं डेरा डाले।

कुछ रुपयों की मिले दिहाड़ी

जुट जाते हैं चंद निवाले।

दिन भर बोझ तगारी ढोते

चैन जुड़ा है रातों से

क्या किस्मत दीनों ने पाई

गिरें पड़ें तो राम दुहाई।

साँसें बंधक  मरते दम तक

दौलत से तुलती भरपाई।

शोषण से शोणित का रिश्ता

गठबंधन है घातों से।

जंग लगे शासन के पुर्जे

अंधा है कानून नकारा।

न्याय दलीलों के दर दाखिल

बेकसूर हर बाज़ी हारा।

फिट करते सब अपनी गोटी

फुरसत किसे बिसातों से।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗