कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १५२ / १६४ № 152 of 164 रचना १५२ / १६४
१३ दिसम्बर २०१९ 13 December 2019 १३ दिसम्बर २०१९

फुटपाथों से phutapaathon se फुटपाथों से

जिनसे जुड़तीं कई इमारतें

जुड़े हुए फुटपाथों से।

॥

ये मजदूर निरे मतवाले

यहाँ वहाँ हैं डेरा डाले।

कुछ रुपयों की मिले दिहाड़ी

जुट जाते हैं चंद निवाले।

॥

दिन भर बोझ तगारी ढोते

चैन जुड़ा है रातों से

॥

क्या किस्मत दीनों ने पाई

गिरें पड़ें तो राम दुहाई।

साँसें बंधक  मरते दम तक

दौलत से तुलती भरपाई।

॥

शोषण से शोणित का रिश्ता

गठबंधन है घातों से।

॥

जंग लगे शासन के पुर्जे

अंधा है कानून नकारा।

न्याय दलीलों के दर दाखिल

बेकसूर हर बाज़ी हारा।

॥

फिट करते सब अपनी गोटी

फुरसत किसे बिसातों से।

jinase judateen kaee imaaraten

jude hue phutapaathon se

·

ye majadoor nire matawaale

yahaan wahaan hain deraa daale

kuch rupayon kee mile dihaadee

jut jaate hain chand niwaale

·

din bhar bojh tagaaree dhote

chain judaa hai raaton se

·

kyaa kismat deenon ne paaee

giren paden to raam duhaaee

saansen bandhak marate dam tak

daulat se tulatee bharapaaee

·

shoshan se shonit kaa rishtaa

gathabandhan hai ghaaton se

·

jang lage shaasan ke purje

andhaa hai kaanoon nakaaraa

nyaay daleelon ke dar daakhil

bekasoor har baazee haaraa

·

phit karate sab apanee gotee

phurasat kise bisaaton se

जिनसे जुड़तीं कई इमारतें

जुड़े हुए फुटपाथों से।

॥

ये मजदूर निरे मतवाले

यहाँ वहाँ हैं डेरा डाले।

कुछ रुपयों की मिले दिहाड़ी

जुट जाते हैं चंद निवाले।

॥

दिन भर बोझ तगारी ढोते

चैन जुड़ा है रातों से

॥

क्या किस्मत दीनों ने पाई

गिरें पड़ें तो राम दुहाई।

साँसें बंधक  मरते दम तक

दौलत से तुलती भरपाई।

॥

शोषण से शोणित का रिश्ता

गठबंधन है घातों से।

॥

जंग लगे शासन के पुर्जे

अंधा है कानून नकारा।

न्याय दलीलों के दर दाखिल

बेकसूर हर बाज़ी हारा।

॥

फिट करते सब अपनी गोटी

फुरसत किसे बिसातों से।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗