कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना १४ / ११४ № 14 of 114 रचना १४ / ११४
१६ अप्रैल २०१६ 16 April 2016 १६ अप्रैल २०१६

साहित्य एवं साहित्यकार/ मेरा परिचय सिंधु केसरी के चेटी-चंड विशेषांक में saahity ewan saahityakaar/ meraa parichay sindhu kesaree ke chetee-chand wisheshaank men साहित्य एवं साहित्यकार/ मेरा परिचय सिंधु केसरी के चेटी-चंड विशेषांक में

जिस तरह

प्रकृति परिवर्तन अटल है, उसी तरह जीव-जीवन में उतार चढ़ाव भी निश्चित है। सुख-दुख, धूप-छाँव, लाभ-हानि, उत्थान-पतन आदि। हर

इंसान को न्यूनाधिक इन समस्याओं से जूझना ही पड़ता है। लेकिन हम यदि यथार्थ को

स्वीकार न करते हुए अपने हौसले ही खो बैठें तो जीना ही दूभर हो जाए। मानव जन्म

किस्मत से ही मिलता है। इसे हर रूप में स्वीकार करके हमें कुदरत का आभार मानना

चाहिए।

मेरा

जीवन भी अनेक

jis tarah

prakriiti pariwartan atal hai, usee tarah jeew-jeewan men utaar chढ़aaw bhee nishchit hai sukh-dukh, dhoop-chaanv, laabh-haani, utthaan-patan aadi har

insaan ko nyoonaadhik in samasyaaon se joojhanaa hee padataa hai lekin ham yadi yathaarth ko

sveekaar n karate hue apane hausale hee kho baithen to jeenaa hee doobhar ho jaae maanaw janm

kismat se hee milataa hai ise har roop men sveekaar karake hamen kudarat kaa aabhaar maananaa

chaahie

·

meraa

jeewan bhee anek

जिस तरह

प्रकृति परिवर्तन अटल है, उसी तरह जीव-जीवन में उतार चढ़ाव भी निश्चित है। सुख-दुख, धूप-छाँव, लाभ-हानि, उत्थान-पतन आदि। हर

इंसान को न्यूनाधिक इन समस्याओं से जूझना ही पड़ता है। लेकिन हम यदि यथार्थ को

स्वीकार न करते हुए अपने हौसले ही खो बैठें तो जीना ही दूभर हो जाए। मानव जन्म

किस्मत से ही मिलता है। इसे हर रूप में स्वीकार करके हमें कुदरत का आभार मानना

चाहिए।

मेरा

जीवन भी अनेक

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗