साहित्य एवं साहित्यकार/ मेरा परिचय सिंधु केसरी के चेटी-चंड विशेषांक में saahity ewan saahityakaar/ meraa parichay sindhu kesaree ke chetee-chand wisheshaank men साहित्य एवं साहित्यकार/ मेरा परिचय सिंधु केसरी के चेटी-चंड विशेषांक में
जिस तरह
प्रकृति परिवर्तन अटल है, उसी तरह जीव-जीवन में उतार चढ़ाव भी निश्चित है। सुख-दुख, धूप-छाँव, लाभ-हानि, उत्थान-पतन आदि। हर
इंसान को न्यूनाधिक इन समस्याओं से जूझना ही पड़ता है। लेकिन हम यदि यथार्थ को
स्वीकार न करते हुए अपने हौसले ही खो बैठें तो जीना ही दूभर हो जाए। मानव जन्म
किस्मत से ही मिलता है। इसे हर रूप में स्वीकार करके हमें कुदरत का आभार मानना
चाहिए।
मेरा
जीवन भी अनेक
jis tarah
prakriiti pariwartan atal hai, usee tarah jeew-jeewan men utaar chढ़aaw bhee nishchit hai sukh-dukh, dhoop-chaanv, laabh-haani, utthaan-patan aadi har
insaan ko nyoonaadhik in samasyaaon se joojhanaa hee padataa hai lekin ham yadi yathaarth ko
sveekaar n karate hue apane hausale hee kho baithen to jeenaa hee doobhar ho jaae maanaw janm
kismat se hee milataa hai ise har roop men sveekaar karake hamen kudarat kaa aabhaar maananaa
chaahie
meraa
jeewan bhee anek
जिस तरह
प्रकृति परिवर्तन अटल है, उसी तरह जीव-जीवन में उतार चढ़ाव भी निश्चित है। सुख-दुख, धूप-छाँव, लाभ-हानि, उत्थान-पतन आदि। हर
इंसान को न्यूनाधिक इन समस्याओं से जूझना ही पड़ता है। लेकिन हम यदि यथार्थ को
स्वीकार न करते हुए अपने हौसले ही खो बैठें तो जीना ही दूभर हो जाए। मानव जन्म
किस्मत से ही मिलता है। इसे हर रूप में स्वीकार करके हमें कुदरत का आभार मानना
चाहिए।
मेरा
जीवन भी अनेक