कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १२४ / २०४ № 124 of 204 रचना १२४ / २०४
१६ अप्रैल २०१६ 16 April 2016 १६ अप्रैल २०१६

फूल बेला के बिना phool belaa ke binaa फूल बेला के बिना

कंत

लौटा फूल बेला के बिना

कामिनी

सँवरी नहीं गजरे बिना

किस

तरह स्वीकार कर ले मानिनी

और

कोई फूल मन भाए बिना

रह

गई माला अधूरी भाव की

गुंथ

न पाई प्रेम के धागे बिना

राह

तकता ही रहा बेला उधर

रात

इधर गुज़री प्रणय-पल के बिना

देख

फीके रंग ऐसे प्यार के

घन

गए घर लौटकर बरसे बिना

चल

पड़ी सुरभित हवा मायूस हो

बाग

वापस ख़ुशबुएँ बाँटे बिना

कंत

बोला मान भी जाओ प्रिये

अब

न आऊँगा कभी बेले बिना

‘कल्पना’ सुन बंद कलियाँ खिल गईं

भोर

का तारा-गगन देखे बिना

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

kant

lautaa phool belaa ke binaa

·

kaaminee

sanvaree naheen gajare binaa

·

kis

tarah sveekaar kar le maaninee

·

aur

koee phool man bhaae binaa

·

rah

gaee maalaa adhooree bhaaw kee

·

gunth

n paaee prem ke dhaage binaa

·

raah

takataa hee rahaa belaa udhar

·

raat

idhar guzaree pranay-pal ke binaa

·

dekh

pheeke rang aise pyaar ke

·

ghan

gae ghar lautakar barase binaa

·

chal

padee surabhit hawaa maayoos ho

·

baag

waapas kushabuen baante binaa

·

kant

bolaa maan bhee jaao priye

·

ab

n aaoongaa kabhee bele binaa

·

‘kalpanaa’ sun band kaliyaan khil gaeen

·

bhor

kaa taaraa-gagan dekhe binaa

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

कंत

लौटा फूल बेला के बिना

कामिनी

सँवरी नहीं गजरे बिना

किस

तरह स्वीकार कर ले मानिनी

और

कोई फूल मन भाए बिना

रह

गई माला अधूरी भाव की

गुंथ

न पाई प्रेम के धागे बिना

राह

तकता ही रहा बेला उधर

रात

इधर गुज़री प्रणय-पल के बिना

देख

फीके रंग ऐसे प्यार के

घन

गए घर लौटकर बरसे बिना

चल

पड़ी सुरभित हवा मायूस हो

बाग

वापस ख़ुशबुएँ बाँटे बिना

कंत

बोला मान भी जाओ प्रिये

अब

न आऊँगा कभी बेले बिना

‘कल्पना’ सुन बंद कलियाँ खिल गईं

भोर

का तारा-गगन देखे बिना

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗