कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ७९ / २०४ № 79 of 204 रचना ७९ / २०४
२५ मार्च २०१५ 25 March 2015 २५ मार्च २०१५

मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी main gazal kahatee rahoongee मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी

गीत

मैं रचती रहूँगी, मीत, यदि तुम पास हो तो

मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी, गर सुरों में साथ दो तो

मैं

नदी होकर भी प्यासी, आदि से हूँ आज दिन तक

रुख

तुम्हारी ओर कर लूँ, तुम जलधि बनकर बहो तो

सच

कहे जो आइना वो, आज तक देखा न मैंने

मैं

सजन सजती रहूँगी, तुम अगर दर्पण बनो तो

इस

जनम में तुमको पाया, धन्य है यह नारी-जीवन

फिर

जनम लेती रहूँगी, हर जनम में तुम मिलो तो

नष्ट

हो तन, तो ये मन, भटकेगा भव की वाटिका में

बन

कली खिलती रहूँगी, तुम भ्रमर बन आ सको तो

प्यार, वादे और

कसमें, इंतिहा अब हो चुकी है

साथ

जीवन भर रहूँगी, इक घरौंदा तुम बुनो तो

खो

भी जाऊँ “कल्पना”, तो ढूँढना इन वादियों में

प्रतिध्वनित

होती रहूँगी, तुम अगर आवाज़ दो तो

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

geet

main rachatee rahoongee, meet, yadi tum paas ho to

·

main gazal kahatee rahoongee, gar suron men saath do to

·

main

nadee hokar bhee pyaasee, aadi se hoon aaj din tak

·

rukh

tumhaaree or kar loon, tum jaladhi banakar baho to

·

sach

kahe jo aainaa wo, aaj tak dekhaa n mainne

·

main

sajan sajatee rahoongee, tum agar darpan bano to

·

is

janam men tumako paayaa, dhany hai yah naaree-jeewan

·

phir

janam letee rahoongee, har janam men tum milo to

·

nasht

ho tan, to ye man, bhatakegaa bhaw kee waatikaa men

·

ban

kalee khilatee rahoongee, tum bhramar ban aa sako to

·

pyaar, waade aur

kasamen, intihaa ab ho chukee hai

·

saath

jeewan bhar rahoongee, ik gharaundaa tum buno to

·

kho

bhee jaaoon “kalpanaa”, to dhoondhanaa in waadiyon men

·

pratidhvanit

hotee rahoongee, tum agar aawaaz do to

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

गीत

मैं रचती रहूँगी, मीत, यदि तुम पास हो तो

मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी, गर सुरों में साथ दो तो

मैं

नदी होकर भी प्यासी, आदि से हूँ आज दिन तक

रुख

तुम्हारी ओर कर लूँ, तुम जलधि बनकर बहो तो

सच

कहे जो आइना वो, आज तक देखा न मैंने

मैं

सजन सजती रहूँगी, तुम अगर दर्पण बनो तो

इस

जनम में तुमको पाया, धन्य है यह नारी-जीवन

फिर

जनम लेती रहूँगी, हर जनम में तुम मिलो तो

नष्ट

हो तन, तो ये मन, भटकेगा भव की वाटिका में

बन

कली खिलती रहूँगी, तुम भ्रमर बन आ सको तो

प्यार, वादे और

कसमें, इंतिहा अब हो चुकी है

साथ

जीवन भर रहूँगी, इक घरौंदा तुम बुनो तो

खो

भी जाऊँ “कल्पना”, तो ढूँढना इन वादियों में

प्रतिध्वनित

होती रहूँगी, तुम अगर आवाज़ दो तो

-कल्पना रामानी

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗