मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी main gazal kahatee rahoongee मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी
गीत
मैं रचती रहूँगी, मीत, यदि तुम पास हो तो
मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी, गर सुरों में साथ दो तो
मैं
नदी होकर भी प्यासी, आदि से हूँ आज दिन तक
रुख
तुम्हारी ओर कर लूँ, तुम जलधि बनकर बहो तो
सच
कहे जो आइना वो, आज तक देखा न मैंने
मैं
सजन सजती रहूँगी, तुम अगर दर्पण बनो तो
इस
जनम में तुमको पाया, धन्य है यह नारी-जीवन
फिर
जनम लेती रहूँगी, हर जनम में तुम मिलो तो
नष्ट
हो तन, तो ये मन, भटकेगा भव की वाटिका में
बन
कली खिलती रहूँगी, तुम भ्रमर बन आ सको तो
प्यार, वादे और
कसमें, इंतिहा अब हो चुकी है
साथ
जीवन भर रहूँगी, इक घरौंदा तुम बुनो तो
खो
भी जाऊँ “कल्पना”, तो ढूँढना इन वादियों में
प्रतिध्वनित
होती रहूँगी, तुम अगर आवाज़ दो तो
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
geet
main rachatee rahoongee, meet, yadi tum paas ho to
main gazal kahatee rahoongee, gar suron men saath do to
main
nadee hokar bhee pyaasee, aadi se hoon aaj din tak
rukh
tumhaaree or kar loon, tum jaladhi banakar baho to
sach
kahe jo aainaa wo, aaj tak dekhaa n mainne
main
sajan sajatee rahoongee, tum agar darpan bano to
is
janam men tumako paayaa, dhany hai yah naaree-jeewan
phir
janam letee rahoongee, har janam men tum milo to
nasht
ho tan, to ye man, bhatakegaa bhaw kee waatikaa men
ban
kalee khilatee rahoongee, tum bhramar ban aa sako to
pyaar, waade aur
kasamen, intihaa ab ho chukee hai
saath
jeewan bhar rahoongee, ik gharaundaa tum buno to
kho
bhee jaaoon “kalpanaa”, to dhoondhanaa in waadiyon men
pratidhvanit
hotee rahoongee, tum agar aawaaz do to
-kalpanaa raamaanee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
गीत
मैं रचती रहूँगी, मीत, यदि तुम पास हो तो
मैं ग़ज़ल कहती रहूँगी, गर सुरों में साथ दो तो
मैं
नदी होकर भी प्यासी, आदि से हूँ आज दिन तक
रुख
तुम्हारी ओर कर लूँ, तुम जलधि बनकर बहो तो
सच
कहे जो आइना वो, आज तक देखा न मैंने
मैं
सजन सजती रहूँगी, तुम अगर दर्पण बनो तो
इस
जनम में तुमको पाया, धन्य है यह नारी-जीवन
फिर
जनम लेती रहूँगी, हर जनम में तुम मिलो तो
नष्ट
हो तन, तो ये मन, भटकेगा भव की वाटिका में
बन
कली खिलती रहूँगी, तुम भ्रमर बन आ सको तो
प्यार, वादे और
कसमें, इंतिहा अब हो चुकी है
साथ
जीवन भर रहूँगी, इक घरौंदा तुम बुनो तो
खो
भी जाऊँ “कल्पना”, तो ढूँढना इन वादियों में
प्रतिध्वनित
होती रहूँगी, तुम अगर आवाज़ दो तो
-कल्पना रामानी
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी