कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ९२ / २०४ № 92 of 204 रचना ९२ / २०४
१ जून २०१५ 1 June 2015 १ जून २०१५

कब आएँगे अच्छे दिन kab aaenge achche din कब आएँगे अच्छे दिन

जतन

किए बिन, सोच रहे जन, कब आएँगे अच्छे दिन

पैराशूट

पहन क्या नभ से, कूद पड़ेंगे अच्छे दिन?

जब

तक हैं ये सुनो बंधुवर,

बँधे खास के खूँटे से

आम

जनों से भला किस तरह आन जुड़ेंगे अच्छे दिन

कलमें

घिस-घिस थके नहीं क्या?

हक़ पाने हथियार बनो

हाथ

जोड़ सिर झुका बात तत्काल सुनेंगे अच्छे दिन

हल

न हिलें, ना बैल बढ़ें, हों खेत खड़े बिन पानी-खाद

बस

ज़ुबान भर चलने से क्या उग आएँगे अच्छे दिन?

खुद

ही किया पलायन घर से, गाँव-गंध-माटी को छोड़

खुद

से नज़र मिला पूछो अब, कब लौटेंगे अच्छे दिन

कर्म पूजना छोड़ चले हैं, धर्म पूजने मंदिर आप

फूल

चढ़ा देने से ही क्या प्रगट भएँगे अच्छे दिन?

जो

गृह-नीति न सुलझा पाते,

राजनीति की करते बात

कुछ

दिन काबिज़ हों,

हाल उनका, तब पूछेंगे अच्छे दिन

सोने

वाले सावधान हो! करता रहा इशारा काल

जागेंगे

जब आप! ‘कल्पना’ तब आएँगे अच्छे दिन

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

jatan

kie bin, soch rahe jan, kab aaenge achche din

·

pairaashoot

pahan kyaa nabh se, kood padenge achche din?

·

jab

tak hain ye suno bandhuwar,

bandhe khaas ke khoonte se

·

aam

janon se bhalaa kis tarah aan judenge achche din

·

kalamen

ghis-ghis thake naheen kyaa?

haq paane hathiyaar bano

·

haath

jod sir jhukaa baat tatkaal sunenge achche din

·

hal

n hilen, naa bail bढ़en, hon khet khade bin paanee-khaad

·

bas

zubaan bhar chalane se kyaa ug aaenge achche din?

·

khud

hee kiyaa palaayan ghar se, gaanv-gandh-maatee ko chod

·

khud

se nazar milaa poocho ab, kab lautenge achche din

·

karm poojanaa chod chale hain, dharm poojane mandir aap

·

phool

chढ़aa dene se hee kyaa pragat bhaenge achche din?

·

jo

griih-neeti n sulajhaa paate,

raajaneeti kee karate baat

·

kuch

din kaabiz hon,

haal unakaa, tab poochenge achche din

·

sone

waale saawadhaan ho! karataa rahaa ishaaraa kaal

·

jaagenge

jab aap! ‘kalpanaa’ tab aaenge achche din

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जतन

किए बिन, सोच रहे जन, कब आएँगे अच्छे दिन

पैराशूट

पहन क्या नभ से, कूद पड़ेंगे अच्छे दिन?

जब

तक हैं ये सुनो बंधुवर,

बँधे खास के खूँटे से

आम

जनों से भला किस तरह आन जुड़ेंगे अच्छे दिन

कलमें

घिस-घिस थके नहीं क्या?

हक़ पाने हथियार बनो

हाथ

जोड़ सिर झुका बात तत्काल सुनेंगे अच्छे दिन

हल

न हिलें, ना बैल बढ़ें, हों खेत खड़े बिन पानी-खाद

बस

ज़ुबान भर चलने से क्या उग आएँगे अच्छे दिन?

खुद

ही किया पलायन घर से, गाँव-गंध-माटी को छोड़

खुद

से नज़र मिला पूछो अब, कब लौटेंगे अच्छे दिन

कर्म पूजना छोड़ चले हैं, धर्म पूजने मंदिर आप

फूल

चढ़ा देने से ही क्या प्रगट भएँगे अच्छे दिन?

जो

गृह-नीति न सुलझा पाते,

राजनीति की करते बात

कुछ

दिन काबिज़ हों,

हाल उनका, तब पूछेंगे अच्छे दिन

सोने

वाले सावधान हो! करता रहा इशारा काल

जागेंगे

जब आप! ‘कल्पना’ तब आएँगे अच्छे दिन

-कल्पना रामानी

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗