कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना ९३ / २०५ № 93 of 205 रचना ९३ / २०५
१ जून २०१५ 1 June 2015 १ जून २०१५

कब आएँगे अच्छे दिन kab aaenge achche din कब आएँगे अच्छे दिन

जतन

किए बिन, सोच रहे जन, कब आएँगे अच्छे दिन

॥

पैराशूट

पहन क्या नभ से, कूद पड़ेंगे अच्छे दिन?

॥

जब

तक हैं ये सुनो बंधुवर,

बँधे खास के खूँटे से

॥

आम

जनों से भला किस तरह आन जुड़ेंगे अच्छे दिन

॥

कलमें

घिस-घिस थके नहीं क्या?

हक़ पाने हथियार बनो

॥

हाथ

जोड़ सिर झुका बात तत्काल सुनेंगे अच्छे दिन

॥

हल

न हिलें, ना बैल बढ़ें, हों खेत खड़े बिन पानी-खाद

॥

बस

ज़ुबान भर चलने से क्या उग आएँगे अच्छे दिन?

॥

खुद

ही किया पलायन घर से, गाँव-गंध-माटी को छोड़

॥

खुद

से नज़र मिला पूछो अब, कब लौटेंगे अच्छे दिन

॥

कर्म पूजना छोड़ चले हैं, धर्म पूजने मंदिर आप

॥

फूल

चढ़ा देने से ही क्या प्रगट भएँगे अच्छे दिन?

॥

जो

गृह-नीति न सुलझा पाते,

राजनीति की करते बात

॥

कुछ

दिन काबिज़ हों,

हाल उनका, तब पूछेंगे अच्छे दिन

॥

सोने

वाले सावधान हो! करता रहा इशारा काल

॥

जागेंगे

जब आप! ‘कल्पना’ तब आएँगे अच्छे दिन

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

jatan

kie bin, soch rahe jan, kab aaenge achche din

·

pairaashoot

pahan kyaa nabh se, kood padenge achche din?

·

jab

tak hain ye suno bandhuwar,

bandhe khaas ke khoonte se

·

aam

janon se bhalaa kis tarah aan judenge achche din

·

kalamen

ghis-ghis thake naheen kyaa?

haq paane hathiyaar bano

·

haath

jod sir jhukaa baat tatkaal sunenge achche din

·

hal

n hilen, naa bail bढ़en, hon khet khade bin paanee-khaad

·

bas

zubaan bhar chalane se kyaa ug aaenge achche din?

·

khud

hee kiyaa palaayan ghar se, gaanv-gandh-maatee ko chod

·

khud

se nazar milaa poocho ab, kab lautenge achche din

·

karm poojanaa chod chale hain, dharm poojane mandir aap

·

phool

chढ़aa dene se hee kyaa pragat bhaenge achche din?

·

jo

griih-neeti n sulajhaa paate,

raajaneeti kee karate baat

·

kuch

din kaabiz hon,

haal unakaa, tab poochenge achche din

·

sone

waale saawadhaan ho! karataa rahaa ishaaraa kaal

·

jaagenge

jab aap! ‘kalpanaa’ tab aaenge achche din

·

-kalpanaa raamaanee

·

protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

जतन

किए बिन, सोच रहे जन, कब आएँगे अच्छे दिन

॥

पैराशूट

पहन क्या नभ से, कूद पड़ेंगे अच्छे दिन?

॥

जब

तक हैं ये सुनो बंधुवर,

बँधे खास के खूँटे से

॥

आम

जनों से भला किस तरह आन जुड़ेंगे अच्छे दिन

॥

कलमें

घिस-घिस थके नहीं क्या?

हक़ पाने हथियार बनो

॥

हाथ

जोड़ सिर झुका बात तत्काल सुनेंगे अच्छे दिन

॥

हल

न हिलें, ना बैल बढ़ें, हों खेत खड़े बिन पानी-खाद

॥

बस

ज़ुबान भर चलने से क्या उग आएँगे अच्छे दिन?

॥

खुद

ही किया पलायन घर से, गाँव-गंध-माटी को छोड़

॥

खुद

से नज़र मिला पूछो अब, कब लौटेंगे अच्छे दिन

॥

कर्म पूजना छोड़ चले हैं, धर्म पूजने मंदिर आप

॥

फूल

चढ़ा देने से ही क्या प्रगट भएँगे अच्छे दिन?

॥

जो

गृह-नीति न सुलझा पाते,

राजनीति की करते बात

॥

कुछ

दिन काबिज़ हों,

हाल उनका, तब पूछेंगे अच्छे दिन

॥

सोने

वाले सावधान हो! करता रहा इशारा काल

॥

जागेंगे

जब आप! ‘कल्पना’ तब आएँगे अच्छे दिन

॥

-कल्पना रामानी

॥

प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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॥

-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗