कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २०१ / २०५ № 201 of 205 रचना २०१ / २०५
१८ जनवरी २०२१ 18 January 2021 १८ जनवरी २०२१

रात-रानी चंद्रिका- ग़ज़ल raat-raanee chandrikaa- gazal रात-रानी चंद्रिका- ग़ज़ल

शुभ्र वसना दुग्ध सी

मन मुग्ध करती चंद्रिका।

तन सितारों से सजाकर

भू पे उतरी चंद्रिका।

॥

चाँद ने जब बुर्ज से

झाँका भुवन की झील में

झिलमिलाती संग आई

सर्द सजनी चंद्रिका।

॥

पात झूमें  पुष्प हरषे

रात ने अँगड़ाई ली

पाश में ले हर कली को

चूम चहकी चंद्रिका।

॥

घन-घनेरे  आसमाँ से

छोड़ डेरा छिप गए

जब धरा पर शीत-बदरी

बन के बरसी चंद्रिका।

॥

पर्वतों से  वादियों से

पाख भर मिलती रही

सागरों की हर लहर से

खूब खेली चंद्रिका।

॥

प्राणियों में प्रेम बोया

रश्मियों से सींचकर

प्रेमियों सँग गुनगुनाई

रात-रानी चंद्रिका।

॥

हर कलम की बन ग़ज़ल

शब भर सफर करती रही

शबनमी प्रातः में चल दी

भाव-भीगी चंद्रिका।

shubhr wasanaa dugdh see

man mugdh karatee chandrikaa

tan sitaaron se sajaakar

bhoo pe utaree chandrikaa

·

chaand ne jab burj se

jhaankaa bhuwan kee jheel men

jhilamilaatee sang aaee

sard sajanee chandrikaa

·

paat jhoomen pushp harashe

raat ne angadaaee lee

paash men le har kalee ko

choom chahakee chandrikaa

·

ghan-ghanere aasamaan se

chod deraa chip gae

jab dharaa par sheet-badaree

ban ke barasee chandrikaa

·

parvaton se waadiyon se

paakh bhar milatee rahee

saagaron kee har lahar se

khoob khelee chandrikaa

·

praaniyon men prem boyaa

rashmiyon se seenchakar

premiyon sang gunagunaaee

raat-raanee chandrikaa

·

har kalam kee ban gazal

shab bhar saphar karatee rahee

shabanamee praatah men chal dee

bhaaw-bheegee chandrikaa

शुभ्र वसना दुग्ध सी

मन मुग्ध करती चंद्रिका।

तन सितारों से सजाकर

भू पे उतरी चंद्रिका।

॥

चाँद ने जब बुर्ज से

झाँका भुवन की झील में

झिलमिलाती संग आई

सर्द सजनी चंद्रिका।

॥

पात झूमें  पुष्प हरषे

रात ने अँगड़ाई ली

पाश में ले हर कली को

चूम चहकी चंद्रिका।

॥

घन-घनेरे  आसमाँ से

छोड़ डेरा छिप गए

जब धरा पर शीत-बदरी

बन के बरसी चंद्रिका।

॥

पर्वतों से  वादियों से

पाख भर मिलती रही

सागरों की हर लहर से

खूब खेली चंद्रिका।

॥

प्राणियों में प्रेम बोया

रश्मियों से सींचकर

प्रेमियों सँग गुनगुनाई

रात-रानी चंद्रिका।

॥

हर कलम की बन ग़ज़ल

शब भर सफर करती रही

शबनमी प्रातः में चल दी

भाव-भीगी चंद्रिका।

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗