कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २०० / २०४ № 200 of 204 रचना २०० / २०४
१८ जनवरी २०२१ 18 January 2021 १८ जनवरी २०२१

रात-रानी चंद्रिका- ग़ज़ल raat-raanee chandrikaa- gazal रात-रानी चंद्रिका- ग़ज़ल

शुभ्र वसना दुग्ध सी

मन मुग्ध करती चंद्रिका।

तन सितारों से सजाकर

भू पे उतरी चंद्रिका।

चाँद ने जब बुर्ज से

झाँका भुवन की झील में

झिलमिलाती संग आई

सर्द सजनी चंद्रिका।

पात झूमें  पुष्प हरषे

रात ने अँगड़ाई ली

पाश में ले हर कली को

चूम चहकी चंद्रिका।

घन-घनेरे  आसमाँ से

छोड़ डेरा छिप गए

जब धरा पर शीत-बदरी

बन के बरसी चंद्रिका।

पर्वतों से  वादियों से

पाख भर मिलती रही

सागरों की हर लहर से

खूब खेली चंद्रिका।

प्राणियों में प्रेम बोया

रश्मियों से सींचकर

प्रेमियों सँग गुनगुनाई

रात-रानी चंद्रिका।

हर कलम की बन ग़ज़ल

शब भर सफर करती रही

शबनमी प्रातः में चल दी

भाव-भीगी चंद्रिका।

shubhr wasanaa dugdh see

man mugdh karatee chandrikaa

tan sitaaron se sajaakar

bhoo pe utaree chandrikaa

·

chaand ne jab burj se

jhaankaa bhuwan kee jheel men

jhilamilaatee sang aaee

sard sajanee chandrikaa

·

paat jhoomen pushp harashe

raat ne angadaaee lee

paash men le har kalee ko

choom chahakee chandrikaa

·

ghan-ghanere aasamaan se

chod deraa chip gae

jab dharaa par sheet-badaree

ban ke barasee chandrikaa

·

parvaton se waadiyon se

paakh bhar milatee rahee

saagaron kee har lahar se

khoob khelee chandrikaa

·

praaniyon men prem boyaa

rashmiyon se seenchakar

premiyon sang gunagunaaee

raat-raanee chandrikaa

·

har kalam kee ban gazal

shab bhar saphar karatee rahee

shabanamee praatah men chal dee

bhaaw-bheegee chandrikaa

शुभ्र वसना दुग्ध सी

मन मुग्ध करती चंद्रिका।

तन सितारों से सजाकर

भू पे उतरी चंद्रिका।

चाँद ने जब बुर्ज से

झाँका भुवन की झील में

झिलमिलाती संग आई

सर्द सजनी चंद्रिका।

पात झूमें  पुष्प हरषे

रात ने अँगड़ाई ली

पाश में ले हर कली को

चूम चहकी चंद्रिका।

घन-घनेरे  आसमाँ से

छोड़ डेरा छिप गए

जब धरा पर शीत-बदरी

बन के बरसी चंद्रिका।

पर्वतों से  वादियों से

पाख भर मिलती रही

सागरों की हर लहर से

खूब खेली चंद्रिका।

प्राणियों में प्रेम बोया

रश्मियों से सींचकर

प्रेमियों सँग गुनगुनाई

रात-रानी चंद्रिका।

हर कलम की बन ग़ज़ल

शब भर सफर करती रही

शबनमी प्रातः में चल दी

भाव-भीगी चंद्रिका।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗