कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १६३ / १६३ № 163 of 163 रचना १६३ / १६३
१८ जनवरी २०२१ 18 January 2021 १८ जनवरी २०२१

सुनो सलोनी -गीत suno salonee -geet सुनो सलोनी -गीत

गीत

सुनो सलोनी!

कहो सुनयना!

आमों-बाग़ मचे हो हल्ले।

छोड़ो मिर्च, ओखली, मूसल

ओढ़ दुपट्टा, डालो चप्पल

मुखड़े को दर्पण दिखला दो

पोंछ पसीना बहता कलकल

दरवाजे पर जड़ दो ताला

उड़काकर खिड़की के पल्ले

पेड़ों चढ़ी खुमारी होगी

डाल-डाल तन भारी होगी

अमराई के पोर-पोर पर

बौरों की फुलकारी होगी

कुहुक रही होगी कोयलिया

चूस आम रस भरे मुटल्ले

मौसम कुछ मदमाता होगा

गुन-गुन गीत सुनाता होगा

और धूप के हाथों में भी

शीत छाँव का छाता होगा

नृत्य भांगड़ा करता होगा

जाट बिजूखा बल्ले बल्ले

करें आज कुछ अपने मन की

चलकर लुत्फ उठाएँ हम भी

अरी सलोनी यों ही इक दिन

बेदम हो जाएगा दम ही

फिर तो वही खिंचाई, खटपट

वही द्वार, घर, गली-मुहल्ले

geet

·

suno salonee!

kaho sunayanaa!

aamon-baag mache ho halle

·

chodo mirch, okhalee, moosal

oढ़ dupattaa, daalo chappal

mukhade ko darpan dikhalaa do

ponch paseenaa bahataa kalakal

·

darawaaje par jad do taalaa

udakaakar khidakee ke palle

·

pedon chढ़ee khumaaree hogee

daal-daal tan bhaaree hogee

amaraaee ke por-por par

bauron kee phulakaaree hogee

·

kuhuk rahee hogee koyaliyaa

choos aam ras bhare mutalle

·

mausam kuch madamaataa hogaa

gun-gun geet sunaataa hogaa

aur dhoop ke haathon men bhee

sheet chaanv kaa chaataa hogaa

·

nriity bhaangadaa karataa hogaa

jaat bijookhaa balle balle

·

karen aaj kuch apane man kee

chalakar lutph uthaaen ham bhee

aree salonee yon hee ik din

bedam ho jaaegaa dam hee

·

phir to wahee khinchaaee, khatapat

wahee dvaar, ghar, galee-muhalle

गीत

सुनो सलोनी!

कहो सुनयना!

आमों-बाग़ मचे हो हल्ले।

छोड़ो मिर्च, ओखली, मूसल

ओढ़ दुपट्टा, डालो चप्पल

मुखड़े को दर्पण दिखला दो

पोंछ पसीना बहता कलकल

दरवाजे पर जड़ दो ताला

उड़काकर खिड़की के पल्ले

पेड़ों चढ़ी खुमारी होगी

डाल-डाल तन भारी होगी

अमराई के पोर-पोर पर

बौरों की फुलकारी होगी

कुहुक रही होगी कोयलिया

चूस आम रस भरे मुटल्ले

मौसम कुछ मदमाता होगा

गुन-गुन गीत सुनाता होगा

और धूप के हाथों में भी

शीत छाँव का छाता होगा

नृत्य भांगड़ा करता होगा

जाट बिजूखा बल्ले बल्ले

करें आज कुछ अपने मन की

चलकर लुत्फ उठाएँ हम भी

अरी सलोनी यों ही इक दिन

बेदम हो जाएगा दम ही

फिर तो वही खिंचाई, खटपट

वही द्वार, घर, गली-मुहल्ले

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗