कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १६४ / १६४ № 164 of 164 रचना १६४ / १६४
१८ जनवरी २०२१ 18 January 2021 १८ जनवरी २०२१

सुनो सलोनी -गीत suno salonee -geet सुनो सलोनी -गीत

गीत

॥

सुनो सलोनी!

कहो सुनयना!

आमों-बाग़ मचे हो हल्ले।

॥

छोड़ो मिर्च, ओखली, मूसल

ओढ़ दुपट्टा, डालो चप्पल

मुखड़े को दर्पण दिखला दो

पोंछ पसीना बहता कलकल

॥

दरवाजे पर जड़ दो ताला

उड़काकर खिड़की के पल्ले

॥

पेड़ों चढ़ी खुमारी होगी

डाल-डाल तन भारी होगी

अमराई के पोर-पोर पर

बौरों की फुलकारी होगी

॥

कुहुक रही होगी कोयलिया

चूस आम रस भरे मुटल्ले

॥

मौसम कुछ मदमाता होगा

गुन-गुन गीत सुनाता होगा

और धूप के हाथों में भी

शीत छाँव का छाता होगा

॥

नृत्य भांगड़ा करता होगा

जाट बिजूखा बल्ले बल्ले

॥

करें आज कुछ अपने मन की

चलकर लुत्फ उठाएँ हम भी

अरी सलोनी यों ही इक दिन

बेदम हो जाएगा दम ही

॥

फिर तो वही खिंचाई, खटपट

वही द्वार, घर, गली-मुहल्ले

geet

·

suno salonee!

kaho sunayanaa!

aamon-baag mache ho halle

·

chodo mirch, okhalee, moosal

oढ़ dupattaa, daalo chappal

mukhade ko darpan dikhalaa do

ponch paseenaa bahataa kalakal

·

darawaaje par jad do taalaa

udakaakar khidakee ke palle

·

pedon chढ़ee khumaaree hogee

daal-daal tan bhaaree hogee

amaraaee ke por-por par

bauron kee phulakaaree hogee

·

kuhuk rahee hogee koyaliyaa

choos aam ras bhare mutalle

·

mausam kuch madamaataa hogaa

gun-gun geet sunaataa hogaa

aur dhoop ke haathon men bhee

sheet chaanv kaa chaataa hogaa

·

nriity bhaangadaa karataa hogaa

jaat bijookhaa balle balle

·

karen aaj kuch apane man kee

chalakar lutph uthaaen ham bhee

aree salonee yon hee ik din

bedam ho jaaegaa dam hee

·

phir to wahee khinchaaee, khatapat

wahee dvaar, ghar, galee-muhalle

गीत

॥

सुनो सलोनी!

कहो सुनयना!

आमों-बाग़ मचे हो हल्ले।

॥

छोड़ो मिर्च, ओखली, मूसल

ओढ़ दुपट्टा, डालो चप्पल

मुखड़े को दर्पण दिखला दो

पोंछ पसीना बहता कलकल

॥

दरवाजे पर जड़ दो ताला

उड़काकर खिड़की के पल्ले

॥

पेड़ों चढ़ी खुमारी होगी

डाल-डाल तन भारी होगी

अमराई के पोर-पोर पर

बौरों की फुलकारी होगी

॥

कुहुक रही होगी कोयलिया

चूस आम रस भरे मुटल्ले

॥

मौसम कुछ मदमाता होगा

गुन-गुन गीत सुनाता होगा

और धूप के हाथों में भी

शीत छाँव का छाता होगा

॥

नृत्य भांगड़ा करता होगा

जाट बिजूखा बल्ले बल्ले

॥

करें आज कुछ अपने मन की

चलकर लुत्फ उठाएँ हम भी

अरी सलोनी यों ही इक दिन

बेदम हो जाएगा दम ही

॥

फिर तो वही खिंचाई, खटपट

वही द्वार, घर, गली-मुहल्ले

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗