कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ८५ / ११४ № 85 of 114 रचना ८५ / ११४
३० अक्तूबर २०१९ 30 October 2019 ३० अक्तूबर २०१९

टाट का पैबंद taat kaa paiband टाट का पैबंद

“आहा! कितना शानदार भवन बनवाया है सुमि! आनंद आ गया... बहुत बहुत बधाई सखी...” गृहप्रवेश के अवसर पर न आ सकने पर खेद प्रगट करती हुई निर्मला बोली।

-कोई बात नहीं निम्मो, सबकी अपनी-अपनी व्यस्तताएँ होती हैं। कहते हुए सुमि ने निम्मो का हाथ अपने हाथ में लिया और बड़े उत्साह के साथ बातें करती हुई पूरा घर दिखाने लगी।

“सुमि, क्या तुमने जॉब छोड़ दिया है”? घर की साज सज्जा से प्रभावित निम्मो ने पूछा।

-नहीं तो...

“फिर इतने बड़े घर की साज-सज्जा, रख-रखाव पर कैसे ध्यान दे पाती हो”?

सुमन कुछ कहती उससे पहले ही निर्मला की नज़रें अचानक उसके शयनकक्ष की दीवार पर अटक गईं तो हैरत में पड़कर बोली-

“अरे सुमि, यह क्या, अपने शयनकक्ष में तुमने यह एक दराज वाला इतना छोटा सा दर्पण, क्यों लगा रखा है? क्या तुमने अलग से शृंगार-कक्ष नहीं बनवाया? इतने सुंदर घर में यह तो मखमल में टाट के पैबंद जैसा महसूस हो रहा है”

-इसमें हैरानी की कोई बात नहीं निम्मो, अगर यह टाट का पैबंद न होता तो क्या मेरा घर मखमल बना रह सकता था? चलो नाश्ता करते हैं...।

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“aahaa! kitanaa shaanadaar bhawan banawaayaa hai sumi! aanand aa gayaa bahut bahut badhaaee sakhee” griihaprawesh ke awasar par n aa sakane par khed pragat karatee huee nirmalaa bolee

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-koee baat naheen nimmo, sabakee apanee-apanee wyastataaen hotee hain kahate hue sumi ne nimmo kaa haath apane haath men liyaa aur bade utsaah ke saath baaten karatee huee pooraa ghar dikhaane lagee

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“sumi, kyaa tumane jॉb chod diyaa hai”? ghar kee saaj sajjaa se prabhaawit nimmo ne poochaa

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-naheen to

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“phir itane bade ghar kee saaj-sajjaa, rakh-rakhaaw par kaise dhyaan de paatee ho”?

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suman kuch kahatee usase pahale hee nirmalaa kee nazaren achaanak usake shayanakaksh kee deewaar par atak gaeen to hairat men padakar bolee-

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“are sumi, yah kyaa, apane shayanakaksh men tumane yah ek daraaj waalaa itanaa chotaa saa darpan, kyon lagaa rakhaa hai? kyaa tumane alag se shriingaar-kaksh naheen banawaayaa? itane sundar ghar men yah to makhamal men taat ke paiband jaisaa mahasoos ho rahaa hai”

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-isamen hairaanee kee koee baat naheen nimmo, agar yah taat kaa paiband n hotaa to kyaa meraa ghar makhamal banaa rah sakataa thaa? chalo naashtaa karate hain

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“आहा! कितना शानदार भवन बनवाया है सुमि! आनंद आ गया... बहुत बहुत बधाई सखी...” गृहप्रवेश के अवसर पर न आ सकने पर खेद प्रगट करती हुई निर्मला बोली।

-कोई बात नहीं निम्मो, सबकी अपनी-अपनी व्यस्तताएँ होती हैं। कहते हुए सुमि ने निम्मो का हाथ अपने हाथ में लिया और बड़े उत्साह के साथ बातें करती हुई पूरा घर दिखाने लगी।

“सुमि, क्या तुमने जॉब छोड़ दिया है”? घर की साज सज्जा से प्रभावित निम्मो ने पूछा।

-नहीं तो...

“फिर इतने बड़े घर की साज-सज्जा, रख-रखाव पर कैसे ध्यान दे पाती हो”?

सुमन कुछ कहती उससे पहले ही निर्मला की नज़रें अचानक उसके शयनकक्ष की दीवार पर अटक गईं तो हैरत में पड़कर बोली-

“अरे सुमि, यह क्या, अपने शयनकक्ष में तुमने यह एक दराज वाला इतना छोटा सा दर्पण, क्यों लगा रखा है? क्या तुमने अलग से शृंगार-कक्ष नहीं बनवाया? इतने सुंदर घर में यह तो मखमल में टाट के पैबंद जैसा महसूस हो रहा है”

-इसमें हैरानी की कोई बात नहीं निम्मो, अगर यह टाट का पैबंद न होता तो क्या मेरा घर मखमल बना रह सकता था? चलो नाश्ता करते हैं...।

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कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗