कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ८४ / ११४ № 84 of 114 रचना ८४ / ११४
३० अक्तूबर २०१९ 30 October 2019 ३० अक्तूबर २०१९

सहेलियाँ saheliyaan सहेलियाँ

गहरे मेकअप और वज़नदार वस्त्राभूषणों से लदी-फँदी ये चारों सहेलियाँ वैसे तो मिलते ही चहकने लगती थीं और बातों से फुर्सत ही नहीं मिलती थी, लेकिन आज पास-पास बैठी होने के बावजूद इन्हें आपस में बातें करने की फुर्सत नहीं थी क्योंकि आज वे एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए आई थीं। लेकिन हाँ, बार-बार अपने पर्स से छोटा सा आइना निकालकर विभिन्न कोणों से खुद को निहारने के बाद कुछ सुनने की चाह में कनखियों से एक दूसरी को अवश्य देख लेती थीं।

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gahare mekaap aur wazanadaar wastraabhooshanon se ladee-phandee ye chaaron saheliyaan waise to milate hee chahakane lagatee theen aur baaton se phursat hee naheen milatee thee, lekin aaj paas-paas baithee hone ke baawajood inhen aapas men baaten karane kee phursat naheen thee kyonki aaj we ek wiwaah samaaroh men shaamil hone ke lie aaee theen lekin haan, baar-baar apane pars se chotaa saa aainaa nikaalakar wibhinn konon se khud ko nihaarane ke baad kuch sunane kee chaah men kanakhiyon se ek doosaree ko awashy dekh letee theen

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गहरे मेकअप और वज़नदार वस्त्राभूषणों से लदी-फँदी ये चारों सहेलियाँ वैसे तो मिलते ही चहकने लगती थीं और बातों से फुर्सत ही नहीं मिलती थी, लेकिन आज पास-पास बैठी होने के बावजूद इन्हें आपस में बातें करने की फुर्सत नहीं थी क्योंकि आज वे एक विवाह समारोह में शामिल होने के लिए आई थीं। लेकिन हाँ, बार-बार अपने पर्स से छोटा सा आइना निकालकर विभिन्न कोणों से खुद को निहारने के बाद कुछ सुनने की चाह में कनखियों से एक दूसरी को अवश्य देख लेती थीं।

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कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗