महिला-विमर्श mahilaa-wimarsh महिला-विमर्श
शाम को चाय का कप लेकर तनुजा लॉन में बैठी ही थी कि डोर-बेल बजी। कप रखकर उसने दरवाजा खोला तो बेटी तान्या के साथ आई हुई महिलाओं को देखकर सवालिया नज़रों से तान्या की ओर देखा-
“माँ, ये सब महिला-मुक्ति अभियान दल की सदस्य हैं, आपकी समस्या पर विमर्श के लिए मैंने इन्हें बुलाया है”।
आप इन सबकी आपबीती और मुक्ति के लिए संघर्ष की कथा सुनेंगी तो जान जाएँगी कि आज की नारी अबला या अशक्त नहीं रही जो पति का बेवजह अत्याचार सहन करती रहे”।
आज फिर माँ-पिता के कमरे से कहासुनी की ऊँची आवाज़ें आने के बाद पिता को बाहर जाते और माँ को गीले नैन पोंछते हुए उनकी युवा बेटी तान्या ने देख लिया था।
तनुजा ने सबको आदर से अंदर बिठाकर तान्या को चाय बनाने के लिए अंदर भेजा फिर महिलाओं की ओर मुखातिब होकर संयत स्वर में बोली -
“आप सभी बहनों का वार्ता के लिए हार्दिक स्वागत है लेकिन पहले मैं अपनी दो बातें आपके समक्ष रखूँगी। पहली यह कि मैं नारी के उस रूप की पक्षधर हूँ जो हर हाल में घर-परिवार तोड़ने नहीं जोड़ने में विश्वास और परिस्थितियों को अपने हौसलों से बस में करने की क्षमता रखती है। दूसरी यह कि मैं जानना चाहती हूँ कि क्या आप सब अपने मौजादा हालात से पूरी तरह संतुष्ट हैं? कृपया क्रमवार अपनी तब और अब की तुलनात्मक स्थिति का विवरण प्रस्तुत कीजिये. अगर आपके उत्तर से मुझे संतुष्टि होगी तो मैं भी आपके इस अभियान में शामिल हो जाऊँगी”।
तनुजा की बातें सुनकर सभी महिलाओं की निगाहें आपस में विमर्श करने लग गईं।
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shaam ko chaay kaa kap lekar tanujaa lॉn men baithee hee thee ki dor-bel bajee kap rakhakar usane darawaajaa kholaa to betee taanyaa ke saath aaee huee mahilaaon ko dekhakar sawaaliyaa nazaron se taanyaa kee or dekhaa-
“maan, ye sab mahilaa-mukti abhiyaan dal kee sadasy hain, aapakee samasyaa par wimarsh ke lie mainne inhen bulaayaa hai”
aap in sabakee aapabeetee aur mukti ke lie sangharsh kee kathaa sunengee to jaan jaaengee ki aaj kee naaree abalaa yaa ashakt naheen rahee jo pati kaa bewajah atyaachaar sahan karatee rahe”
aaj phir maan-pitaa ke kamare se kahaasunee kee oonchee aawaazen aane ke baad pitaa ko baahar jaate aur maan ko geele nain ponchate hue unakee yuwaa betee taanyaa ne dekh liyaa thaa
tanujaa ne sabako aadar se andar bithaakar taanyaa ko chaay banaane ke lie andar bhejaa phir mahilaaon kee or mukhaatib hokar sanyat svar men bolee -
“aap sabhee bahanon kaa waartaa ke lie haardik svaagat hai lekin pahale main apanee do baaten aapake samaksh rakhoongee pahalee yah ki main naaree ke us roop kee pakshadhar hoon jo har haal men ghar-pariwaar todane naheen jodane men wishvaas aur paristhitiyon ko apane hausalon se bas men karane kee kshamataa rakhatee hai doosaree yah ki main jaananaa chaahatee hoon ki kyaa aap sab apane maujaadaa haalaat se pooree tarah santusht hain? kriipayaa kramawaar apanee tab aur ab kee tulanaatmak sthiti kaa wiwaran prastut keejiye agar aapake uttar se mujhe santushti hogee to main bhee aapake is abhiyaan men shaamil ho jaaoongee”
tanujaa kee baaten sunakar sabhee mahilaaon kee nigaahen aapas men wimarsh karane lag gaeen
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शाम को चाय का कप लेकर तनुजा लॉन में बैठी ही थी कि डोर-बेल बजी। कप रखकर उसने दरवाजा खोला तो बेटी तान्या के साथ आई हुई महिलाओं को देखकर सवालिया नज़रों से तान्या की ओर देखा-
“माँ, ये सब महिला-मुक्ति अभियान दल की सदस्य हैं, आपकी समस्या पर विमर्श के लिए मैंने इन्हें बुलाया है”।
आप इन सबकी आपबीती और मुक्ति के लिए संघर्ष की कथा सुनेंगी तो जान जाएँगी कि आज की नारी अबला या अशक्त नहीं रही जो पति का बेवजह अत्याचार सहन करती रहे”।
आज फिर माँ-पिता के कमरे से कहासुनी की ऊँची आवाज़ें आने के बाद पिता को बाहर जाते और माँ को गीले नैन पोंछते हुए उनकी युवा बेटी तान्या ने देख लिया था।
तनुजा ने सबको आदर से अंदर बिठाकर तान्या को चाय बनाने के लिए अंदर भेजा फिर महिलाओं की ओर मुखातिब होकर संयत स्वर में बोली -
“आप सभी बहनों का वार्ता के लिए हार्दिक स्वागत है लेकिन पहले मैं अपनी दो बातें आपके समक्ष रखूँगी। पहली यह कि मैं नारी के उस रूप की पक्षधर हूँ जो हर हाल में घर-परिवार तोड़ने नहीं जोड़ने में विश्वास और परिस्थितियों को अपने हौसलों से बस में करने की क्षमता रखती है। दूसरी यह कि मैं जानना चाहती हूँ कि क्या आप सब अपने मौजादा हालात से पूरी तरह संतुष्ट हैं? कृपया क्रमवार अपनी तब और अब की तुलनात्मक स्थिति का विवरण प्रस्तुत कीजिये. अगर आपके उत्तर से मुझे संतुष्टि होगी तो मैं भी आपके इस अभियान में शामिल हो जाऊँगी”।
तनुजा की बातें सुनकर सभी महिलाओं की निगाहें आपस में विमर्श करने लग गईं।
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