पसीने से जब जब paseene se jab jab पसीने से जब जब
पसीने से जब-जब नहाती है गर्मी
हवाओं से हमको मिलाती है गर्मी
उगे-भोर, चिड़िया बनी चहचहाती
चमन की तरफ लेके जाती है गर्मी
पकड़ हाथ चलती है फुलवारियों में
झकोरों से झूला झुलाती है गर्मी
छतों पर सितारों की छाया में शब भर
सरस रागिनी गा सुलाती है गर्मी
विजन वन में पेड़ों की बन छाँव सुखकर
महक के गलीचे बिछाती है गर्मी
अगम झील में, ताल में, नाव खेकर
धवल धार-जल में घुमाती है गर्मी
पहाड़ों पे, फूलों-भरी वादियों में
हमें देके न्यौता बुलाती है गर्मी
पिला जूस, लस्सी या नींबू शिकंजी
तपन की चुभन से बचाती है गर्मी
डरें ‘कल्पना’ क्यों भला गर्मियों से
कि राहत भी लेकर ही आती है गर्मी
-कल्पना रामानी
नवी मुंबई
paseene se jab-jab nahaatee hai garmee
hawaaon se hamako milaatee hai garmee
uge-bhor, chidiyaa banee chahachahaatee
chaman kee taraph leke jaatee hai garmee
pakad haath chalatee hai phulawaariyon men
jhakoron se jhoolaa jhulaatee hai garmee
chaton par sitaaron kee chaayaa men shab bhar
saras raaginee gaa sulaatee hai garmee
wijan wan men pedon kee ban chaanv sukhakar
mahak ke galeeche bichaatee hai garmee
agam jheel men, taal men, naaw khekar
dhawal dhaar-jal men ghumaatee hai garmee
pahaadon pe, phoolon-bharee waadiyon men
hamen deke nyautaa bulaatee hai garmee
pilaa joos, lassee yaa neenboo shikanjee
tapan kee chubhan se bachaatee hai garmee
daren ‘kalpanaa’ kyon bhalaa garmiyon se
ki raahat bhee lekar hee aatee hai garmee
-kalpanaa raamaanee
nawee munbaee
पसीने से जब-जब नहाती है गर्मी
हवाओं से हमको मिलाती है गर्मी
उगे-भोर, चिड़िया बनी चहचहाती
चमन की तरफ लेके जाती है गर्मी
पकड़ हाथ चलती है फुलवारियों में
झकोरों से झूला झुलाती है गर्मी
छतों पर सितारों की छाया में शब भर
सरस रागिनी गा सुलाती है गर्मी
विजन वन में पेड़ों की बन छाँव सुखकर
महक के गलीचे बिछाती है गर्मी
अगम झील में, ताल में, नाव खेकर
धवल धार-जल में घुमाती है गर्मी
पहाड़ों पे, फूलों-भरी वादियों में
हमें देके न्यौता बुलाती है गर्मी
पिला जूस, लस्सी या नींबू शिकंजी
तपन की चुभन से बचाती है गर्मी
डरें ‘कल्पना’ क्यों भला गर्मियों से
कि राहत भी लेकर ही आती है गर्मी
-कल्पना रामानी
नवी मुंबई