कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १३४ / २०५ № 134 of 205 रचना १३४ / २०५
४ अगस्त २०१६ 4 August 2016 ४ अगस्त २०१६

आओगे ना! aaoge naa! आओगे ना!

दिल की दुनिया पुनः बसाने, आओगे ना!

॥

रूठी हूँ तो मुझे मनाने, आओगे ना!

॥

रंग हुए बदरंग, नज़ारों के हैं

सारे

॥

नव-रंगों के ले नज़राने, आओगे ना!

॥

भूलीं नहीं ये गलियाँ अब तक, वो दीवानगी

॥

इन गलियों में फिर दीवाने, आओगे ना!

॥

छोड़ गईं ख़ुशबुएँ खफा हो मन बगिया को

॥

तुम सुगंध बन, मन महकाने, आओगे ना!

॥

सहमा-सहमा समय खो चुका है गति अपनी

॥

थमे पलों को गतिय बनाने, आओगे ना!

॥

शेर मेरे सुन, रो दोगे तुम, मुझे पता है

॥

जी भर हँसने और हँसाने, आओगे ना!

॥

हक़ न रहा अब करूँ शिकायत तुमसे कोई

॥

पर तुम तो अधिकार जताने, आओगे ना!

॥

भूल ‘कल्पना’ मानी अपनी, मैंने साथी!

॥

एक बार तो सज़ा सुनाने, आओगे ना!

॥

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

॥

-कल्पना रामानी

dil kee duniyaa punah basaane, aaoge naa!

·

roothee hoon to mujhe manaane, aaoge naa!

·

rang hue badarang, nazaaron ke hain

saare

·

naw-rangon ke le nazaraane, aaoge naa!

·

bhooleen naheen ye galiyaan ab tak, wo deewaanagee

·

in galiyon men phir deewaane, aaoge naa!

·

chod gaeen kushabuen khaphaa ho man bagiyaa ko

·

tum sugandh ban, man mahakaane, aaoge naa!

·

sahamaa-sahamaa samay kho chukaa hai gati apanee

·

thame palon ko gatiy banaane, aaoge naa!

·

sher mere sun, ro doge tum, mujhe pataa hai

·

jee bhar hansane aur hansaane, aaoge naa!

·

haq n rahaa ab karoon shikaayat tumase koee

·

par tum to adhikaar jataane, aaoge naa!

·

bhool ‘kalpanaa’ maanee apanee, mainne saathee!

·

ek baar to sazaa sunaane, aaoge naa!

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

दिल की दुनिया पुनः बसाने, आओगे ना!

॥

रूठी हूँ तो मुझे मनाने, आओगे ना!

॥

रंग हुए बदरंग, नज़ारों के हैं

सारे

॥

नव-रंगों के ले नज़राने, आओगे ना!

॥

भूलीं नहीं ये गलियाँ अब तक, वो दीवानगी

॥

इन गलियों में फिर दीवाने, आओगे ना!

॥

छोड़ गईं ख़ुशबुएँ खफा हो मन बगिया को

॥

तुम सुगंध बन, मन महकाने, आओगे ना!

॥

सहमा-सहमा समय खो चुका है गति अपनी

॥

थमे पलों को गतिय बनाने, आओगे ना!

॥

शेर मेरे सुन, रो दोगे तुम, मुझे पता है

॥

जी भर हँसने और हँसाने, आओगे ना!

॥

हक़ न रहा अब करूँ शिकायत तुमसे कोई

॥

पर तुम तो अधिकार जताने, आओगे ना!

॥

भूल ‘कल्पना’ मानी अपनी, मैंने साथी!

॥

एक बार तो सज़ा सुनाने, आओगे ना!

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-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗