कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १३३ / २०४ № 133 of 204 रचना १३३ / २०४
४ अगस्त २०१६ 4 August 2016 ४ अगस्त २०१६

आओगे ना! aaoge naa! आओगे ना!

दिल की दुनिया पुनः बसाने, आओगे ना!

रूठी हूँ तो मुझे मनाने, आओगे ना!

रंग हुए बदरंग, नज़ारों के हैं

सारे

नव-रंगों के ले नज़राने, आओगे ना!

भूलीं नहीं ये गलियाँ अब तक, वो दीवानगी

इन गलियों में फिर दीवाने, आओगे ना!

छोड़ गईं ख़ुशबुएँ खफा हो मन बगिया को

तुम सुगंध बन, मन महकाने, आओगे ना!

सहमा-सहमा समय खो चुका है गति अपनी

थमे पलों को गतिय बनाने, आओगे ना!

शेर मेरे सुन, रो दोगे तुम, मुझे पता है

जी भर हँसने और हँसाने, आओगे ना!

हक़ न रहा अब करूँ शिकायत तुमसे कोई

पर तुम तो अधिकार जताने, आओगे ना!

भूल ‘कल्पना’ मानी अपनी, मैंने साथी!

एक बार तो सज़ा सुनाने, आओगे ना!

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

पुनः पधारिए

-कल्पना रामानी

dil kee duniyaa punah basaane, aaoge naa!

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roothee hoon to mujhe manaane, aaoge naa!

·

rang hue badarang, nazaaron ke hain

saare

·

naw-rangon ke le nazaraane, aaoge naa!

·

bhooleen naheen ye galiyaan ab tak, wo deewaanagee

·

in galiyon men phir deewaane, aaoge naa!

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chod gaeen kushabuen khaphaa ho man bagiyaa ko

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tum sugandh ban, man mahakaane, aaoge naa!

·

sahamaa-sahamaa samay kho chukaa hai gati apanee

·

thame palon ko gatiy banaane, aaoge naa!

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sher mere sun, ro doge tum, mujhe pataa hai

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jee bhar hansane aur hansaane, aaoge naa!

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haq n rahaa ab karoon shikaayat tumase koee

·

par tum to adhikaar jataane, aaoge naa!

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bhool ‘kalpanaa’ maanee apanee, mainne saathee!

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ek baar to sazaa sunaane, aaoge naa!

·

-kalpanaa raamaanee protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar

punah padhaarie

·

-kalpanaa raamaanee

दिल की दुनिया पुनः बसाने, आओगे ना!

रूठी हूँ तो मुझे मनाने, आओगे ना!

रंग हुए बदरंग, नज़ारों के हैं

सारे

नव-रंगों के ले नज़राने, आओगे ना!

भूलीं नहीं ये गलियाँ अब तक, वो दीवानगी

इन गलियों में फिर दीवाने, आओगे ना!

छोड़ गईं ख़ुशबुएँ खफा हो मन बगिया को

तुम सुगंध बन, मन महकाने, आओगे ना!

सहमा-सहमा समय खो चुका है गति अपनी

थमे पलों को गतिय बनाने, आओगे ना!

शेर मेरे सुन, रो दोगे तुम, मुझे पता है

जी भर हँसने और हँसाने, आओगे ना!

हक़ न रहा अब करूँ शिकायत तुमसे कोई

पर तुम तो अधिकार जताने, आओगे ना!

भूल ‘कल्पना’ मानी अपनी, मैंने साथी!

एक बार तो सज़ा सुनाने, आओगे ना!

-कल्पना रामानी प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार

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-कल्पना रामानी

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗