कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ८८ / १६३ № 88 of 163 रचना ८८ / १६३
१६ दिसम्बर २०१४ 16 December 2014 १६ दिसम्बर २०१४

जब धरा पर धूम से jab dharaa par dhoom se जब धरा पर धूम से

जब धरा पर

धूम से ऋतु शीत आती

है

दीन हीनों पर पसर आसन

जमाती है।

खूब भाते हैं खुले

डेरे इसे

प्यार से यह पाश में

उनको कसे

ज़ुल्म ने फरियाद उनकी

कब सुनी

जो किसी दूजे ठिकाने

यह बसे

बंद घर

देते नहीं हैं भाव जब

इसको

बेबसों फुटपथियों पर

ताव

खाती है

जब इसे संपन्नता

है ठेलती

गर्म कमरों का कहर

यह झेलती

खोजती फिर काँपते

कोने कहीं &

jab dharaa par

·

dhoom se riitu sheet aatee

hai

·

deen heenon par pasar aasan

·

jamaatee hai

·

khoob bhaate hain khule

·

dere ise

·

pyaar se yah paash men

·

unako kase

·

zulm ne phariyaad unakee

·

kab sunee

·

jo kisee dooje thikaane

·

yah base

·

band ghar

·

dete naheen hain bhaaw jab

isako

·

bebason phutapathiyon par

taaw

·

khaatee hai

·

jab ise sanpannataa

·

hai thelatee

·

garm kamaron kaa kahar

·

yah jhelatee

·

khojatee phir kaanpate

·

kone kaheen &

जब धरा पर

धूम से ऋतु शीत आती

है

दीन हीनों पर पसर आसन

जमाती है।

खूब भाते हैं खुले

डेरे इसे

प्यार से यह पाश में

उनको कसे

ज़ुल्म ने फरियाद उनकी

कब सुनी

जो किसी दूजे ठिकाने

यह बसे

बंद घर

देते नहीं हैं भाव जब

इसको

बेबसों फुटपथियों पर

ताव

खाती है

जब इसे संपन्नता

है ठेलती

गर्म कमरों का कहर

यह झेलती

खोजती फिर काँपते

कोने कहीं &

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗