ढलने लगी है ज़िन्दगी dhalane lagee hai zindagee ढलने लगी है ज़िन्दगी
सांध्य-सूरज की तरह, ढलने लगी है ज़िंदगी।
थाम वैसाखी, सफर करने लगी है
ज़िंदगी।
हर कदम हर वक्त, जो रफ्तार के रथ पर चली
उम्र की इस शाम में, थमने लगी है ज़िंदगी।
फूल बन खिलती रही, बाली उमर के बाग में
शूल बनकर अब वही, चुभने लगी है ज़िंदगी।
जो ठहाकों से हिलाती थी दरो दीवार को
मूक हो सदियों से यों, लगने लगी है ज़िंदगी।
कल धधकती ज्वाल थी, अब शेष हैं चिंगारियाँ
धीरे-धीरे राख बन, बुझने लगी है ज़िंदगी।
ख्वाब बन आती रही, रातों को गहरी नींद में
लेकिन अब ख्वाबों से ही, मिटने लगी है
ज़िंदगी।
जो अडिग चट्टान थी, टुकड़े हुई अब टूटकर
'कल्पना' अब मौत से, डरने लगी है ज़िंदगी।
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी
saandhy-sooraj kee tarah, dhalane lagee hai zindagee
thaam waisaakhee, saphar karane lagee hai
zindagee
har kadam har wakt, jo raphtaar ke rath par chalee
umr kee is shaam men, thamane lagee hai zindagee
phool ban khilatee rahee, baalee umar ke baag men
shool banakar ab wahee, chubhane lagee hai zindagee
jo thahaakon se hilaatee thee daro deewaar ko
mook ho sadiyon se yon, lagane lagee hai zindagee
kal dhadhakatee jvaal thee, ab shesh hain chingaariyaan
dheere-dheere raakh ban, bujhane lagee hai zindagee
khvaab ban aatee rahee, raaton ko gaharee neend men
lekin ab khvaabon se hee, mitane lagee hai
zindagee
jo adig chattaan thee, tukade huee ab tootakar
'kalpanaa' ab maut se, darane lagee hai zindagee
protsaahit karatee huee sundar tippanee ke lie aapakaa haardik aabhaar
punah padhaarie
-kalpanaa raamaanee
सांध्य-सूरज की तरह, ढलने लगी है ज़िंदगी।
थाम वैसाखी, सफर करने लगी है
ज़िंदगी।
हर कदम हर वक्त, जो रफ्तार के रथ पर चली
उम्र की इस शाम में, थमने लगी है ज़िंदगी।
फूल बन खिलती रही, बाली उमर के बाग में
शूल बनकर अब वही, चुभने लगी है ज़िंदगी।
जो ठहाकों से हिलाती थी दरो दीवार को
मूक हो सदियों से यों, लगने लगी है ज़िंदगी।
कल धधकती ज्वाल थी, अब शेष हैं चिंगारियाँ
धीरे-धीरे राख बन, बुझने लगी है ज़िंदगी।
ख्वाब बन आती रही, रातों को गहरी नींद में
लेकिन अब ख्वाबों से ही, मिटने लगी है
ज़िंदगी।
जो अडिग चट्टान थी, टुकड़े हुई अब टूटकर
'कल्पना' अब मौत से, डरने लगी है ज़िंदगी।
प्रोत्साहित करती हुई सुंदर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार
पुनः पधारिए
-कल्पना रामानी