स्वाद svaad स्वाद
गर्मी की एक शाम को रमा चौपाटी पर अपने पति अमित के साथ चाट का आनंद ले रही थी, तभी वहाँ एक ७-८ वर्षीय फटेहाल बालक आया और जूठी प्लेटों की ओर इशारा करके चाट वाले से बोला- “बाबूजी, ये प्लेटें धो दूँ? सुबह से भूखा हूँ लेकिन काम नहीं मिला”।
“नहीं मुझे आवश्यकता नहीं है बच्चे, आगे देखो...”
रमा ने बालक को चाट दिलानी चाही लेकिन उसने इंकार करते हुए कहा- “मैं भिखारी नहीं हूँ माँ जी”।
रमा कुछ कहती उससे पहले ही वो तेज़ी से अगले ठेले पर पहुँच चुका था। वो किंकर्त्तव्य विमूढ़ सी गरीबी और खुद्दारी का अनोखा गठबंधन देखती रह गई।
चाट वाले को पैसे देकर सामने ही आइसक्रीम-पार्लर पर पहुँचकर वे अपनी-अपनी मनपसंद आइसक्रीम का स्वाद लेने बाहर कुर्सियों पर बैठ गए लेकिन रमा की नज़रें अब भी सामने उस बालक का पीछा कर रही थीं जो अब तक वैसे ही चाट वालों की उस लंबी कतार में एक के बाद एक ठेले से ठेला जा रहा था।
“आइसक्रीम पिघलती जा रही है रमा! कहाँ ध्यान है तुम्हारा”? अचानक पतिदेव की आवाज़ से वो चौंक गई और उस बालक की ओर इशारा करके बोली-
“देखो न अभी तक वो बालक भूखा फिर रहा है, कितने निर्दयी हैं ये ठेले वाले...पता नहीं उसका घर कहाँ है?”
“अरे क्या ठेले वालों की शामत आई है, जो उस बालक से काम करवाएँ...वो देखो क्या लिखा है.” कहते हुए अमित ने एक पोस्टर की ओर इशारा कर दिया जहाँ लिखा था- “बाल श्रम करवाना कानूनी अपराध है.”
“तो क्या अब वो यों ही भटकता रहेगा? उसके लिए कुछ तो सोचो न अमित प्लीज़...!”
अमित अपनी पत्नी की संवेदनशीलता से अच्छी तरह परिचित था, वो समझ गया अब ऐसे छुटकारा नहीं मिलने वाला, बोला-
“ठीक है तुम जल्दी आइसक्रीम समाप्त करो हम उसे समझाकर कुछ खिला-पिला देंगे और पूछकर उसके घर या फिर बाल-आश्रम में पहुँचा देंगे.”
सुनते ही रमा झट से अपनी आइसक्रीम फेंककर बोली- “चलो जल्दी, वैसे भी आज आइसक्रीम में स्वाद ही नहीं है.”
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garmee kee ek shaam ko ramaa chaupaatee par apane pati amit ke saath chaat kaa aanand le rahee thee, tabhee wahaan ek 7-8 warsheey phatehaal baalak aayaa aur joothee pleton kee or ishaaraa karake chaat waale se bolaa- “baaboojee, ye pleten dho doon? subah se bhookhaa hoon lekin kaam naheen milaa”
“naheen mujhe aawashyakataa naheen hai bachche, aage dekho”
ramaa ne baalak ko chaat dilaanee chaahee lekin usane inkaar karate hue kahaa- “main bhikhaaree naheen hoon maan jee”
ramaa kuch kahatee usase pahale hee wo tezee se agale thele par pahunch chukaa thaa wo kinkarttavy wimooढ़ see gareebee aur khuddaaree kaa anokhaa gathabandhan dekhatee rah gaee
chaat waale ko paise dekar saamane hee aaisakreem-paarlar par pahunchakar we apanee-apanee manapasand aaisakreem kaa svaad lene baahar kursiyon par baith gae lekin ramaa kee nazaren ab bhee saamane us baalak kaa peechaa kar rahee theen jo ab tak waise hee chaat waalon kee us lanbee kataar men ek ke baad ek thele se thelaa jaa rahaa thaa
“aaisakreem pighalatee jaa rahee hai ramaa! kahaan dhyaan hai tumhaaraa”? achaanak patidew kee aawaaz se wo chaunk gaee aur us baalak kee or ishaaraa karake bolee-
“dekho n abhee tak wo baalak bhookhaa phir rahaa hai, kitane nirdayee hain ye thele waalepataa naheen usakaa ghar kahaan hai?”
“are kyaa thele waalon kee shaamat aaee hai, jo us baalak se kaam karawaaenwo dekho kyaa likhaa hai” kahate hue amit ne ek postar kee or ishaaraa kar diyaa jahaan likhaa thaa- “baal shram karawaanaa kaanoonee aparaadh hai”
“to kyaa ab wo yon hee bhatakataa rahegaa? usake lie kuch to socho n amit pleez!”
amit apanee patnee kee sanvedanasheelataa se achchee tarah parichit thaa, wo samajh gayaa ab aise chutakaaraa naheen milane waalaa, bolaa-
“theek hai tum jaldee aaisakreem samaapt karo ham use samajhaakar kuch khilaa-pilaa denge aur poochakar usake ghar yaa phir baal-aashram men pahunchaa denge”
sunate hee ramaa jhat se apanee aaisakreem phenkakar bolee- “chalo jaldee, waise bhee aaj aaisakreem men svaad hee naheen hai”
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गर्मी की एक शाम को रमा चौपाटी पर अपने पति अमित के साथ चाट का आनंद ले रही थी, तभी वहाँ एक ७-८ वर्षीय फटेहाल बालक आया और जूठी प्लेटों की ओर इशारा करके चाट वाले से बोला- “बाबूजी, ये प्लेटें धो दूँ? सुबह से भूखा हूँ लेकिन काम नहीं मिला”।
“नहीं मुझे आवश्यकता नहीं है बच्चे, आगे देखो...”
रमा ने बालक को चाट दिलानी चाही लेकिन उसने इंकार करते हुए कहा- “मैं भिखारी नहीं हूँ माँ जी”।
रमा कुछ कहती उससे पहले ही वो तेज़ी से अगले ठेले पर पहुँच चुका था। वो किंकर्त्तव्य विमूढ़ सी गरीबी और खुद्दारी का अनोखा गठबंधन देखती रह गई।
चाट वाले को पैसे देकर सामने ही आइसक्रीम-पार्लर पर पहुँचकर वे अपनी-अपनी मनपसंद आइसक्रीम का स्वाद लेने बाहर कुर्सियों पर बैठ गए लेकिन रमा की नज़रें अब भी सामने उस बालक का पीछा कर रही थीं जो अब तक वैसे ही चाट वालों की उस लंबी कतार में एक के बाद एक ठेले से ठेला जा रहा था।
“आइसक्रीम पिघलती जा रही है रमा! कहाँ ध्यान है तुम्हारा”? अचानक पतिदेव की आवाज़ से वो चौंक गई और उस बालक की ओर इशारा करके बोली-
“देखो न अभी तक वो बालक भूखा फिर रहा है, कितने निर्दयी हैं ये ठेले वाले...पता नहीं उसका घर कहाँ है?”
“अरे क्या ठेले वालों की शामत आई है, जो उस बालक से काम करवाएँ...वो देखो क्या लिखा है.” कहते हुए अमित ने एक पोस्टर की ओर इशारा कर दिया जहाँ लिखा था- “बाल श्रम करवाना कानूनी अपराध है.”
“तो क्या अब वो यों ही भटकता रहेगा? उसके लिए कुछ तो सोचो न अमित प्लीज़...!”
अमित अपनी पत्नी की संवेदनशीलता से अच्छी तरह परिचित था, वो समझ गया अब ऐसे छुटकारा नहीं मिलने वाला, बोला-
“ठीक है तुम जल्दी आइसक्रीम समाप्त करो हम उसे समझाकर कुछ खिला-पिला देंगे और पूछकर उसके घर या फिर बाल-आश्रम में पहुँचा देंगे.”
सुनते ही रमा झट से अपनी आइसक्रीम फेंककर बोली- “चलो जल्दी, वैसे भी आज आइसक्रीम में स्वाद ही नहीं है.”
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