कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १८ / ५२ № 18 of 52 रचना १८ / ५२
१८ जून २०१६ 18 June 2016 १८ जून २०१६

सिक जो सूरजु आखिर उगंदो sik jo sooraju aakhir ugando सिक जो सूरजु आखिर उगंदो

हर

माण्हूँ पहिंजापो घुरंदो।

॥

सिक

जो सूरजु आखिर उगंदो।

॥

शहरनि

जो पक्को हर रस्तो

॥

कचिनि

गलिनि खे जोड़े रखंदो।

॥

रामु

नज़र ईंदो मस्जिद में

॥

ऐं

रहीमु मंदिर में झुकंदो।

॥

दिसी परियाँ दुश्मन जो पाछो

गुलु

बि कंडनि जी कुंड में लिकंदो

॥

खलिहाननि

जो हकु हुकुमनि खे

॥

कंधु

झुकाए दियणो पवंदो।

॥

पापनि

ऐं ज़ुल्मनि खे क़ीतो

॥

करिणीअ

जो जियरे ही मिलंदो।

॥

हर

मौसमु थींदो दिण वांगुरु

॥

हर

घर

har

maanhoon pahinjaapo ghurando

·

sik

jo sooraju aakhir ugando

·

shaharani

jo pakko har rasto

·

kachini

galini khe jode rakhando

·

raamu

nazar eendo masjid men

·

ain

raheemu mandir men jhukando

·

disee pariyaan dushman jo paacho

gulu

bi kandani jee kund men likando

·

khalihaanani

jo haku hukumani khe

·

kandhu

jhukaae diyano pawando

·

paapani

ain zulmani khe qeeto

·

karineea

jo jiyare hee milando

·

har

mausamu theendo din waanguru

·

har

ghar

हर

माण्हूँ पहिंजापो घुरंदो।

॥

सिक

जो सूरजु आखिर उगंदो।

॥

शहरनि

जो पक्को हर रस्तो

॥

कचिनि

गलिनि खे जोड़े रखंदो।

॥

रामु

नज़र ईंदो मस्जिद में

॥

ऐं

रहीमु मंदिर में झुकंदो।

॥

दिसी परियाँ दुश्मन जो पाछो

गुलु

बि कंडनि जी कुंड में लिकंदो

॥

खलिहाननि

जो हकु हुकुमनि खे

॥

कंधु

झुकाए दियणो पवंदो।

॥

पापनि

ऐं ज़ुल्मनि खे क़ीतो

॥

करिणीअ

जो जियरे ही मिलंदो।

॥

हर

मौसमु थींदो दिण वांगुरु

॥

हर

घर

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗