कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२४ / १६३ № 124 of 163 रचना १२४ / १६३
१८ जून २०१६ 18 June 2016 १८ जून २०१६

और पिता तुम aur pitaa tum और पिता तुम

माँ होती है

जाँ बच्चों की

और पिता! तुम

माँ

की जान।

माँ धरती, तुम आसमान हो

सन्तानें

दोनों से पोषित।

देख

फूलते-फलते हमको

सदय-सृष्टि भी

होती हर्षित।

माँ पर करती गर्व

गृहस्थी

तुमसे यह घर स्वर्ग

समान।

ठोस आवरण सिर्फ दिखावा

गुस्सा होता क्षणिक

तुम्हारा।

बच्चों की हर ज़िद के

आगे

है पितृत्व तुम्हारा

हारा।

संवेदन का स्रोत

तुम्हारे

हिय में रहता नित

maan hotee hai

jaan bachchon kee

·

aur pitaa! tum

maan

·

kee jaan

·

maan dharatee, tum aasamaan ho

·

santaanen

donon se poshit

·

dekh

phoolate-phalate hamako

·

saday-sriishti bhee

hotee harshit

·

maan par karatee garv

griihasthee

·

tumase yah ghar svarg

·

samaan

·

thos aawaran sirph dikhaawaa

·

gussaa hotaa kshanik

tumhaaraa

·

bachchon kee har zid ke

aage

·

hai pitriitv tumhaaraa

haaraa

·

sanvedan kaa srot

tumhaare

·

hiy men rahataa nit

माँ होती है

जाँ बच्चों की

और पिता! तुम

माँ

की जान।

माँ धरती, तुम आसमान हो

सन्तानें

दोनों से पोषित।

देख

फूलते-फलते हमको

सदय-सृष्टि भी

होती हर्षित।

माँ पर करती गर्व

गृहस्थी

तुमसे यह घर स्वर्ग

समान।

ठोस आवरण सिर्फ दिखावा

गुस्सा होता क्षणिक

तुम्हारा।

बच्चों की हर ज़िद के

आगे

है पितृत्व तुम्हारा

हारा।

संवेदन का स्रोत

तुम्हारे

हिय में रहता नित

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗