कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना १२५ / १६४ № 125 of 164 रचना १२५ / १६४
१८ जून २०१६ 18 June 2016 १८ जून २०१६

और पिता तुम aur pitaa tum और पिता तुम

माँ होती है

जाँ बच्चों की

॥

और पिता! तुम

माँ

॥

की जान।

॥

माँ धरती, तुम आसमान हो

॥

सन्तानें

दोनों से पोषित।

॥

देख

फूलते-फलते हमको

॥

सदय-सृष्टि भी

होती हर्षित।

॥

माँ पर करती गर्व

गृहस्थी

॥

तुमसे यह घर स्वर्ग

॥

समान।

॥

ठोस आवरण सिर्फ दिखावा

॥

गुस्सा होता क्षणिक

तुम्हारा।

॥

बच्चों की हर ज़िद के

आगे

॥

है पितृत्व तुम्हारा

हारा।

॥

संवेदन का स्रोत

तुम्हारे

॥

हिय में रहता नित

maan hotee hai

jaan bachchon kee

·

aur pitaa! tum

maan

·

kee jaan

·

maan dharatee, tum aasamaan ho

·

santaanen

donon se poshit

·

dekh

phoolate-phalate hamako

·

saday-sriishti bhee

hotee harshit

·

maan par karatee garv

griihasthee

·

tumase yah ghar svarg

·

samaan

·

thos aawaran sirph dikhaawaa

·

gussaa hotaa kshanik

tumhaaraa

·

bachchon kee har zid ke

aage

·

hai pitriitv tumhaaraa

haaraa

·

sanvedan kaa srot

tumhaare

·

hiy men rahataa nit

माँ होती है

जाँ बच्चों की

॥

और पिता! तुम

माँ

॥

की जान।

॥

माँ धरती, तुम आसमान हो

॥

सन्तानें

दोनों से पोषित।

॥

देख

फूलते-फलते हमको

॥

सदय-सृष्टि भी

होती हर्षित।

॥

माँ पर करती गर्व

गृहस्थी

॥

तुमसे यह घर स्वर्ग

॥

समान।

॥

ठोस आवरण सिर्फ दिखावा

॥

गुस्सा होता क्षणिक

तुम्हारा।

॥

बच्चों की हर ज़िद के

आगे

॥

है पितृत्व तुम्हारा

हारा।

॥

संवेदन का स्रोत

तुम्हारे

॥

हिय में रहता नित

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗