कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २१ / ५२ № 21 of 52 रचना २१ / ५२
१३ जुलाई २०१६ 13 July 2016 १३ जुलाई २०१६

छा चवाँ माँ chaa chawaan maan छा चवाँ माँ

तूँ

मिलण आएँ न,

हाणे

छा चवाँ माँ।

छा

थियण वारो सुभाणे, छा चवाँ माँ।

छो

पई रोएँ,

पुछियो

हुन रात मूँखाँ

प्यार

माँ आले विहाणे,

छा

चवाँ माँ।

दर्दु

दई व्यो खुद रुसी, सरतिनि पुछयो पए

छो

वतो वैरागु राणे, छा चवाँ माँ।

चाह

में घणि जी शहरि व्यो, हू उते अजु

पेट

लइ प्यो ख़ाक छाणे, छा चवाँ माँ।

बिज त पोखे सभु सुठा, पाले कया वण

फल

बिगाड़या कहिड़े दाणे,

toon

milan aaen n,

haane

chaa chawaan maan

·

chaa

thiyan waaro subhaane, chaa chawaan maan

·

cho

paee roen,

puchiyo

hun raat moonkhaan

·

pyaar

maan aale wihaane,

chaa

chawaan maan

·

dardu

daee wyo khud rusee, saratini puchayo pae

·

cho

wato wairaagu raane, chaa chawaan maan

·

chaah

men ghani jee shahari wyo, hoo ute aju

·

pet

lai pyo kaak chaane, chaa chawaan maan

·

bij t pokhe sabhu suthaa, paale kayaa wan

·

phal

bigaadayaa kahide daane,

तूँ

मिलण आएँ न,

हाणे

छा चवाँ माँ।

छा

थियण वारो सुभाणे, छा चवाँ माँ।

छो

पई रोएँ,

पुछियो

हुन रात मूँखाँ

प्यार

माँ आले विहाणे,

छा

चवाँ माँ।

दर्दु

दई व्यो खुद रुसी, सरतिनि पुछयो पए

छो

वतो वैरागु राणे, छा चवाँ माँ।

चाह

में घणि जी शहरि व्यो, हू उते अजु

पेट

लइ प्यो ख़ाक छाणे, छा चवाँ माँ।

बिज त पोखे सभु सुठा, पाले कया वण

फल

बिगाड़या कहिड़े दाणे,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗