कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ११ / ११४ № 11 of 114 रचना ११ / ११४
१५ अक्तूबर २०१५ 15 October 2015 १५ अक्तूबर २०१५

नाखून naakhoon नाखून

माँ, मेरी प्यारी माँ!

बहुत

नाराज़ हो न! मुझे भी तुम्हारा इतना सुंदर दुपट्टा खराब हो जाने का बहुत दुख है, बस अब यह गरबा उत्सव निकल जाए फिर अपने

ये लंबे नाखून काट दूँगी। मैं जानती हूँ माँ, तुम

खुद को कभी नहीं बदल सकोगी। दिन भर दुपट्टा ओढ़े रखना...हुंह! कहते हुए नीलू शुभदा

के गले से लिपट गई।

शुभदा

की एक ही तो संतान है, प्यारी सी बेटी नीलू, जो अब १८ वर्ष की हो चुकी है, इसी साल से कॉलेज जाना

maan, meree pyaaree maan!

·

bahut

naaraaz ho n! mujhe bhee tumhaaraa itanaa sundar dupattaa kharaab ho jaane kaa bahut dukh hai, bas ab yah garabaa utsaw nikal jaae phir apane

ye lanbe naakhoon kaat doongee main jaanatee hoon maan, tum

khud ko kabhee naheen badal sakogee din bhar dupattaa oढ़e rakhanaahunh! kahate hue neeloo shubhadaa

ke gale se lipat gaee

·

shubhadaa

kee ek hee to santaan hai, pyaaree see betee neeloo, jo ab 18 warsh kee ho chukee hai, isee saal se kॉlej jaanaa

माँ, मेरी प्यारी माँ!

बहुत

नाराज़ हो न! मुझे भी तुम्हारा इतना सुंदर दुपट्टा खराब हो जाने का बहुत दुख है, बस अब यह गरबा उत्सव निकल जाए फिर अपने

ये लंबे नाखून काट दूँगी। मैं जानती हूँ माँ, तुम

खुद को कभी नहीं बदल सकोगी। दिन भर दुपट्टा ओढ़े रखना...हुंह! कहते हुए नीलू शुभदा

के गले से लिपट गई।

शुभदा

की एक ही तो संतान है, प्यारी सी बेटी नीलू, जो अब १८ वर्ष की हो चुकी है, इसी साल से कॉलेज जाना

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗