कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना २७ / ५२ № 27 of 52 रचना २७ / ५२
२८ जुलाई २०१६ 28 July 2016 २८ जुलाई २०१६

लवें काँगु कहिं दरि lawen kaangu kahin dari लवें काँगु कहिं दरि

सतायल

खे सदु अजु थो दे कोई-कोई।

लखनि

में लियाक़त रखे, कोई-कोई।

थियनि

हादसा रोज़ु रस्तनि ते था पर

दिसी चोट खाधलु, रुके कोई-कोई।

समुहिं

कैमरे जे लगनि रोजु पौधा

लगल, तिनि खे पाणी, पुछे कोई-कोई।

उदाइनि

प्या तर माल साम्हूँ बुख्यनि जे

बुखुनि

लाइ तरो पिणि, छदे

कोई-कोई।

अग्याँ

सूर्ज उभिरियल जे, हथ हरको जोड़े

बुदे जिनि जो सिजु, हथु रखे कोई-कोई।

लवें

काँगु

sataayal

khe sadu aju tho de koee-koee

·

lakhani

men liyaaqat rakhe, koee-koee

·

thiyani

haadasaa rozu rastani te thaa par

·

disee chot khaadhalu, ruke koee-koee

·

samuhin

kaimare je lagani roju paudhaa

·

lagal, tini khe paanee, puche koee-koee

·

udaaini

pyaa tar maal saamhoon bukhyani je

·

bukhuni

laai taro pini, chade

koee-koee

·

agyaan

soorj ubhiriyal je, hath harako jode

·

bude jini jo siju, hathu rakhe koee-koee

·

lawen

kaangu

सतायल

खे सदु अजु थो दे कोई-कोई।

लखनि

में लियाक़त रखे, कोई-कोई।

थियनि

हादसा रोज़ु रस्तनि ते था पर

दिसी चोट खाधलु, रुके कोई-कोई।

समुहिं

कैमरे जे लगनि रोजु पौधा

लगल, तिनि खे पाणी, पुछे कोई-कोई।

उदाइनि

प्या तर माल साम्हूँ बुख्यनि जे

बुखुनि

लाइ तरो पिणि, छदे

कोई-कोई।

अग्याँ

सूर्ज उभिरियल जे, हथ हरको जोड़े

बुदे जिनि जो सिजु, हथु रखे कोई-कोई।

लवें

काँगु

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗