कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४२ / १६४ № 42 of 164 रचना ४२ / १६४
२९ अक्तूबर २०१३ 29 October 2013 २९ अक्तूबर २०१३

आ गई प्रिय फिर दिवाली aa gaee priy phir diwaalee आ गई प्रिय फिर दिवाली

आ गई प्रिय, फिर दिवाली, पर्व पावन है।

॥

एक दीपक तुम जलाओ, इक जलाऊँ मैं।

॥

घोर तम की यामिनी

॥

दुल्हन बनी इतरा रही।

॥

अवनि से अंबर तलक

॥

ज्योतिरमई मन भा रही।

॥

रोशनी की रीत यह, युग

युग से कायम

है।

॥

दीप में प्रिय, घृत भरो, बाती सजाऊँ मैं।

॥

सज रही आँगन रंगोली

॥

द्वार लड़ियाँ हार हैं।

॥

नवल वस्त्रों में सभी

॥

छोटे बड़े तैयार हैं।

॥

यह सगुन की

aa gaee priy, phir diwaalee, parv paawan hai

·

ek deepak tum jalaao, ik jalaaoon main

·

ghor tam kee yaaminee

·

dulhan banee itaraa rahee

·

awani se anbar talak

·

jyotiramaee man bhaa rahee

·

roshanee kee reet yah, yug

yug se kaayam

hai

·

deep men priy, ghriit bharo, baatee sajaaoon main

·

saj rahee aangan rangolee

·

dvaar ladiyaan haar hain

·

nawal wastron men sabhee

·

chote bade taiyaar hain

·

yah sagun kee

आ गई प्रिय, फिर दिवाली, पर्व पावन है।

॥

एक दीपक तुम जलाओ, इक जलाऊँ मैं।

॥

घोर तम की यामिनी

॥

दुल्हन बनी इतरा रही।

॥

अवनि से अंबर तलक

॥

ज्योतिरमई मन भा रही।

॥

रोशनी की रीत यह, युग

युग से कायम

है।

॥

दीप में प्रिय, घृत भरो, बाती सजाऊँ मैं।

॥

सज रही आँगन रंगोली

॥

द्वार लड़ियाँ हार हैं।

॥

नवल वस्त्रों में सभी

॥

छोटे बड़े तैयार हैं।

॥

यह सगुन की

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗