आ गई प्रिय फिर दिवाली aa gaee priy phir diwaalee आ गई प्रिय फिर दिवाली
आ गई प्रिय, फिर दिवाली, पर्व पावन है।
एक दीपक तुम जलाओ, इक जलाऊँ मैं।
घोर तम की यामिनी
दुल्हन बनी इतरा रही।
अवनि से अंबर तलक
ज्योतिरमई मन भा रही।
रोशनी की रीत यह, युग
युग से कायम
है।
दीप में प्रिय, घृत भरो, बाती सजाऊँ मैं।
सज रही आँगन रंगोली
द्वार लड़ियाँ हार हैं।
नवल वस्त्रों में सभी
छोटे बड़े तैयार हैं।
यह सगुन की
aa gaee priy, phir diwaalee, parv paawan hai
ek deepak tum jalaao, ik jalaaoon main
ghor tam kee yaaminee
dulhan banee itaraa rahee
awani se anbar talak
jyotiramaee man bhaa rahee
roshanee kee reet yah, yug
yug se kaayam
hai
deep men priy, ghriit bharo, baatee sajaaoon main
saj rahee aangan rangolee
dvaar ladiyaan haar hain
nawal wastron men sabhee
chote bade taiyaar hain
yah sagun kee
आ गई प्रिय, फिर दिवाली, पर्व पावन है।
एक दीपक तुम जलाओ, इक जलाऊँ मैं।
घोर तम की यामिनी
दुल्हन बनी इतरा रही।
अवनि से अंबर तलक
ज्योतिरमई मन भा रही।
रोशनी की रीत यह, युग
युग से कायम
है।
दीप में प्रिय, घृत भरो, बाती सजाऊँ मैं।
सज रही आँगन रंगोली
द्वार लड़ियाँ हार हैं।
नवल वस्त्रों में सभी
छोटे बड़े तैयार हैं।
यह सगुन की