कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४१ / १६३ № 41 of 163 रचना ४१ / १६३
७ अक्तूबर २०१३ 7 October 2013 ७ अक्तूबर २०१३

किसके हाथ जले रावण kisake haath jale raawan किसके हाथ जले रावण

उस रावण को भूलें

अब, जो

सदियों पहले खाक

हुआ।

समय कह रहा उसे

जलाएँ

अंतर में जो बसा

हुआ।

धनुष बाण है हाथ

सभी के

राम स्वयं को सब कहते।

सज्जनता का ढोंग

रचा

हर रोज़ हरण सीता

करते।

पहचानें उस दानव को

जो

मानवता का दम

भरते

कालिख कैसे नज़र

पड़े

चेहरे पर चेहरा लगा हुआ।

शोषित है जनता

सारी,वो

करुण कथा अब किसे

कहे

जो समर्थ हैं वही

लुटेरे

us raawan ko bhoolen

ab, jo

·

sadiyon pahale khaak

huaa

·

samay kah rahaa use

jalaaen

·

antar men jo basaa

huaa

·

dhanush baan hai haath

sabhee ke

·

raam svayan ko sab kahate

·

sajjanataa kaa dhong

rachaa

·

har roz haran seetaa

karate

·

pahachaanen us daanaw ko

jo

·

maanawataa kaa dam

bharate

·

kaalikh kaise nazar

pade

·

chehare par cheharaa lagaa huaa

·

shoshit hai janataa

saaree,wo

·

karun kathaa ab kise

kahe

·

jo samarth hain wahee

lutere

उस रावण को भूलें

अब, जो

सदियों पहले खाक

हुआ।

समय कह रहा उसे

जलाएँ

अंतर में जो बसा

हुआ।

धनुष बाण है हाथ

सभी के

राम स्वयं को सब कहते।

सज्जनता का ढोंग

रचा

हर रोज़ हरण सीता

करते।

पहचानें उस दानव को

जो

मानवता का दम

भरते

कालिख कैसे नज़र

पड़े

चेहरे पर चेहरा लगा हुआ।

शोषित है जनता

सारी,वो

करुण कथा अब किसे

कहे

जो समर्थ हैं वही

लुटेरे

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗