कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
सभी रचनाएँ All writings सभ रचनाऊं
कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी नवगीत Navgeet नवगीतु · रचना ४१ / १६४ № 41 of 164 रचना ४१ / १६४
७ अक्तूबर २०१३ 7 October 2013 ७ अक्तूबर २०१३

किसके हाथ जले रावण kisake haath jale raawan किसके हाथ जले रावण

उस रावण को भूलें

अब, जो

॥

सदियों पहले खाक

हुआ।

॥

समय कह रहा उसे

जलाएँ

॥

अंतर में जो बसा

हुआ।

॥

धनुष बाण है हाथ

सभी के

॥

राम स्वयं को सब कहते।

॥

सज्जनता का ढोंग

रचा

॥

हर रोज़ हरण सीता

करते।

॥

पहचानें उस दानव को

जो

॥

मानवता का दम

भरते

॥

कालिख कैसे नज़र

पड़े

॥

चेहरे पर चेहरा लगा हुआ।

॥

शोषित है जनता

सारी,वो

॥

करुण कथा अब किसे

कहे

॥

जो समर्थ हैं वही

लुटेरे

us raawan ko bhoolen

ab, jo

·

sadiyon pahale khaak

huaa

·

samay kah rahaa use

jalaaen

·

antar men jo basaa

huaa

·

dhanush baan hai haath

sabhee ke

·

raam svayan ko sab kahate

·

sajjanataa kaa dhong

rachaa

·

har roz haran seetaa

karate

·

pahachaanen us daanaw ko

jo

·

maanawataa kaa dam

bharate

·

kaalikh kaise nazar

pade

·

chehare par cheharaa lagaa huaa

·

shoshit hai janataa

saaree,wo

·

karun kathaa ab kise

kahe

·

jo samarth hain wahee

lutere

उस रावण को भूलें

अब, जो

॥

सदियों पहले खाक

हुआ।

॥

समय कह रहा उसे

जलाएँ

॥

अंतर में जो बसा

हुआ।

॥

धनुष बाण है हाथ

सभी के

॥

राम स्वयं को सब कहते।

॥

सज्जनता का ढोंग

रचा

॥

हर रोज़ हरण सीता

करते।

॥

पहचानें उस दानव को

जो

॥

मानवता का दम

भरते

॥

कालिख कैसे नज़र

पड़े

॥

चेहरे पर चेहरा लगा हुआ।

॥

शोषित है जनता

सारी,वो

॥

करुण कथा अब किसे

कहे

॥

जो समर्थ हैं वही

लुटेरे

कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗