कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी ग़ज़ल Ghazal ग़ज़ल · रचना १६४ / २०४ № 164 of 204 रचना १६४ / २०४
६ नवम्बर २०१९ 6 November 2019 ६ नवम्बर २०१९

मंजिलें आगे खड़ी हैं manjilen aage khadee hain मंजिलें आगे खड़ी हैं

मंज़िलें आगे खड़ी हैं

चल पड़ें रुकना नहीं।

मुश्किलों के खौफ से

पीछे हटें अच्छा नहीं।

राह जो बाधा बने

उस पर विजय पुल बाँध लें

जो इरादों पर अटल है

वो कभी हारा नहीं।

कोसते हैं भाग्य को जो

कर्म से मुँह मोड़कर

फल की चाहत किसलिए

जब बीज ही बोया नहीं।

व्यर्थ पिंजर में पड़े जो

पर कटे पंछी बने

क्यों मिले आकाश जब

उड़ना कभी चाहा नहीं।

ज़िक्र उसका अंजुमन में

किस तरह होगा भला।

जब गजल का व्याकरण ही

आज तक सीखा नहीं।

ज़िंदगी का राज़ क्या है

क्या करेंगे जानकर

क्यों मिला मानुष जनम

जब राज़ यह जाना नहीं।

manzilen aage khadee hain

chal paden rukanaa naheen

mushkilon ke khauph se

peeche haten achchaa naheen

·

raah jo baadhaa bane

us par wijay pul baandh len

jo iraadon par atal hai

wo kabhee haaraa naheen

·

kosate hain bhaagy ko jo

karm se munh modakar

phal kee chaahat kisalie

jab beej hee boyaa naheen

·

wyarth pinjar men pade jo

par kate panchee bane

kyon mile aakaash jab

udanaa kabhee chaahaa naheen

·

zikr usakaa anjuman men

kis tarah hogaa bhalaa

jab gajal kaa wyaakaran hee

aaj tak seekhaa naheen

·

zindagee kaa raaz kyaa hai

kyaa karenge jaanakar

kyon milaa maanush janam

jab raaz yah jaanaa naheen

मंज़िलें आगे खड़ी हैं

चल पड़ें रुकना नहीं।

मुश्किलों के खौफ से

पीछे हटें अच्छा नहीं।

राह जो बाधा बने

उस पर विजय पुल बाँध लें

जो इरादों पर अटल है

वो कभी हारा नहीं।

कोसते हैं भाग्य को जो

कर्म से मुँह मोड़कर

फल की चाहत किसलिए

जब बीज ही बोया नहीं।

व्यर्थ पिंजर में पड़े जो

पर कटे पंछी बने

क्यों मिले आकाश जब

उड़ना कभी चाहा नहीं।

ज़िक्र उसका अंजुमन में

किस तरह होगा भला।

जब गजल का व्याकरण ही

आज तक सीखा नहीं।

ज़िंदगी का राज़ क्या है

क्या करेंगे जानकर

क्यों मिला मानुष जनम

जब राज़ यह जाना नहीं।

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗