इक जहाँ ऐसा भी हो ik jahaan aisaa bhee ho इक जहाँ ऐसा भी हो
मौज के मेले जहाँ हों
इक जहाँ ऐसा भी हो।
नेह बरसे बादलों से
आसमाँ, ऐसा भी हो।
हों नदी सागर उफनते
और निर्झर वेगमय
शक्त पर्वत उर्वरा भू
स्वर्ग हाँ, ऐसा भी हो।
पंछियों को डर न हो
वन जीव हों निर्भय सभी
क़ातिलों का ही क़तल हो
कुछ वहाँ, ऐसा भी हो।
एक गुलशन सा दिखे यह
देश फूलों से भरा
स्नेह से सींचे उसे इक
बागबाँ, ऐसा भी हो।
एकता की ले पताका
चल पड़ें लाखों क़दम
हर शहर हर गाँव गुज़रे
कारवाँ, ऐसा भी हो।
खुशनुमा जनतंत्र हो
सुख की बसी हों बस्तियाँ
साथ अपने हों सदा, हर
आशियाँ, ऐसा भी हो।
थाम कर में लेखनी
लिखते रहें नित छंद जन
‘कल्पना’ इतिहास को
कुछ दें निशां, ऐसा भी हो।
mauj ke mele jahaan hon
ik jahaan aisaa bhee ho
neh barase baadalon se
aasamaan, aisaa bhee ho
hon nadee saagar uphanate
aur nirjhar wegamay
shakt parvat urvaraa bhoo
svarg haan, aisaa bhee ho
panchiyon ko dar n ho
wan jeew hon nirbhay sabhee
qaatilon kaa hee qatal ho
kuch wahaan, aisaa bhee ho
ek gulashan saa dikhe yah
desh phoolon se bharaa
sneh se seenche use ik
baagabaan, aisaa bhee ho
ekataa kee le pataakaa
chal paden laakhon qadam
har shahar har gaanv guzare
kaarawaan, aisaa bhee ho
khushanumaa janatantr ho
sukh kee basee hon bastiyaan
saath apane hon sadaa, har
aashiyaan, aisaa bhee ho
thaam kar men lekhanee
likhate rahen nit chand jan
‘kalpanaa’ itihaas ko
kuch den nishaan, aisaa bhee ho
मौज के मेले जहाँ हों
इक जहाँ ऐसा भी हो।
नेह बरसे बादलों से
आसमाँ, ऐसा भी हो।
हों नदी सागर उफनते
और निर्झर वेगमय
शक्त पर्वत उर्वरा भू
स्वर्ग हाँ, ऐसा भी हो।
पंछियों को डर न हो
वन जीव हों निर्भय सभी
क़ातिलों का ही क़तल हो
कुछ वहाँ, ऐसा भी हो।
एक गुलशन सा दिखे यह
देश फूलों से भरा
स्नेह से सींचे उसे इक
बागबाँ, ऐसा भी हो।
एकता की ले पताका
चल पड़ें लाखों क़दम
हर शहर हर गाँव गुज़रे
कारवाँ, ऐसा भी हो।
खुशनुमा जनतंत्र हो
सुख की बसी हों बस्तियाँ
साथ अपने हों सदा, हर
आशियाँ, ऐसा भी हो।
थाम कर में लेखनी
लिखते रहें नित छंद जन
‘कल्पना’ इतिहास को
कुछ दें निशां, ऐसा भी हो।