अधूरी मन्नत /कहानी adhooree mannat /kahaanee अधूरी मन्नत /कहानी
दमयंती की आँखों के सामने चाहे स्वच्छ अनंत आसमान था, मगर उसके मनस्पटल पर घोर काले बादल उमड़-घुमड़ मचा रहे थे. सहसा बिजली सी कौंधी और बादल बरसने लगे. उसका हाथ बरबस ही भीगे हुए गालों पर चला गया. अचानक दमयंती के मनस्पटल पर एक चित्र उभरा और उसने खुद को अपनी उम्र की ४८ वीं सीढ़ी से नीचे उतरते पाया. हर सीढ़ी पर भूली बिसरी यादें अपना अपना अक्स दिखाती हुई गुजरने लगीं और वो ज्योंही १२ वीं सीढ़ी पर पहुँची,
damayantee kee aankhon ke saamane chaahe svachch anant aasamaan thaa, magar usake manaspatal par ghor kaale baadal umad-ghumad machaa rahe the sahasaa bijalee see kaundhee aur baadal barasane lage usakaa haath barabas hee bheege hue gaalon par chalaa gayaa achaanak damayantee ke manaspatal par ek chitr ubharaa aur usane khud ko apanee umr kee 48 ween seeढ़ee se neeche utarate paayaa har seeढ़ee par bhoolee bisaree yaaden apanaa apanaa aks dikhaatee huee gujarane lageen aur wo jyonhee 12 ween seeढ़ee par pahunchee,
दमयंती की आँखों के सामने चाहे स्वच्छ अनंत आसमान था, मगर उसके मनस्पटल पर घोर काले बादल उमड़-घुमड़ मचा रहे थे. सहसा बिजली सी कौंधी और बादल बरसने लगे. उसका हाथ बरबस ही भीगे हुए गालों पर चला गया. अचानक दमयंती के मनस्पटल पर एक चित्र उभरा और उसने खुद को अपनी उम्र की ४८ वीं सीढ़ी से नीचे उतरते पाया. हर सीढ़ी पर भूली बिसरी यादें अपना अपना अक्स दिखाती हुई गुजरने लगीं और वो ज्योंही १२ वीं सीढ़ी पर पहुँची,