कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ५२ / ११४ № 52 of 114 रचना ५२ / ११४
२६ मई २०१७ 26 May 2017 २६ मई २०१७

ग्रीन सिग्नल green signal ग्रीन सिग्नल

“वृद्धाश्रम...??? ओह बेटे, तुमने यह सोच भी कैसे लिया कि मैं इसके लिए तैयार हो जाऊँगी...?”

दुखातिरेक से तरुणा की आँखों में आँसू उतर आए.

देवेश सामने ही सिर झुकाए खड़ा था, संयत स्वर में बोला-

-माँ मैंने सिर्फ पूछा है आपसे, आप तो जानती हैं, आपकी इच्छा के बिना मैं आपके बारे में कोई निर्णय नहीं ले सकता. आप एक बार ठण्डे मन से विचार कर लीजियेगा, मुझे फैसला करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है,

“wriiddhaashram??? oh bete, tumane yah soch bhee kaise liyaa ki main isake lie taiyaar ho jaaoongee?”

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dukhaatirek se tarunaa kee aankhon men aansoo utar aae

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dewesh saamane hee sir jhukaae khadaa thaa, sanyat svar men bolaa-

·

-maan mainne sirph poochaa hai aapase, aap to jaanatee hain, aapakee ichchaa ke binaa main aapake baare men koee nirnay naheen le sakataa aap ek baar thande man se wichaar kar leejiyegaa, mujhe phaisalaa karane ke lie teen maheene kaa samay diyaa gayaa hai,

“वृद्धाश्रम...??? ओह बेटे, तुमने यह सोच भी कैसे लिया कि मैं इसके लिए तैयार हो जाऊँगी...?”

दुखातिरेक से तरुणा की आँखों में आँसू उतर आए.

देवेश सामने ही सिर झुकाए खड़ा था, संयत स्वर में बोला-

-माँ मैंने सिर्फ पूछा है आपसे, आप तो जानती हैं, आपकी इच्छा के बिना मैं आपके बारे में कोई निर्णय नहीं ले सकता. आप एक बार ठण्डे मन से विचार कर लीजियेगा, मुझे फैसला करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है,

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗