कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३ poet  ·  1951 – 2023 कवयित्री  ·  १९५१ – २०२३
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कल्पना रामानी Kalpana Ramani कल्पना रामानी कहानी Story कहाणी · रचना ३० / ११४ № 30 of 114 रचना ३० / ११४
३१ दिसम्बर २०१६ 31 December 2016 ३१ दिसम्बर २०१६

रिश्तों का बाग rishton kaa baag रिश्तों का बाग

“अरे शालू दीदी, आप!

विनी की शादी के बाद तो शक्ल ही नहीं दिखाई,

माँ आपको बहुत याद करती है” खुशी से भरकर जब अमन ने शालिनी का स्वागत किया तो उसकी

आँखें भीगे बिना न रह सकीं।

“शिक्षण कार्य में ही समय कट जाता है अमन,

दो दिन विद्यालय की छुट्टी थी और मेले के अंतिम दिन भी,

तो सोचा इस बार तुम लोगों के साथ ही मेला घूम लूँगी,

सबसे मिलना भी हो जाएगा”। हँसते हुई शालिनी बोली।

शालिनी तलाक़शुदा थी और २०

“are shaaloo deedee, aap!

winee kee shaadee ke baad to shakl hee naheen dikhaaee,

maan aapako bahut yaad karatee hai” khushee se bharakar jab aman ne shaalinee kaa svaagat kiyaa to usakee

aankhen bheege binaa n rah sakeen

·

“shikshan kaary men hee samay kat jaataa hai aman,

do din widyaalay kee chuttee thee aur mele ke antim din bhee,

to sochaa is baar tum logon ke saath hee melaa ghoom loongee,

sabase milanaa bhee ho jaaegaa” hansate huee shaalinee bolee

·

shaalinee talaaqashudaa thee aur 20

“अरे शालू दीदी, आप!

विनी की शादी के बाद तो शक्ल ही नहीं दिखाई,

माँ आपको बहुत याद करती है” खुशी से भरकर जब अमन ने शालिनी का स्वागत किया तो उसकी

आँखें भीगे बिना न रह सकीं।

“शिक्षण कार्य में ही समय कट जाता है अमन,

दो दिन विद्यालय की छुट्टी थी और मेले के अंतिम दिन भी,

तो सोचा इस बार तुम लोगों के साथ ही मेला घूम लूँगी,

सबसे मिलना भी हो जाएगा”। हँसते हुई शालिनी बोली।

शालिनी तलाक़शुदा थी और २०

कल्पना Kalpana कल्पना

मूल स्रोत ↗ Original source ↗ असल सोरस ↗