स्वाद /लघुकथा svaad /laghukathaa स्वाद /लघुकथा
गर्मी की
एक शाम को रमा चौपाटी पर अपने पति अमित के साथ चाट का आनंद ले रही थी,
तभी
वहाँ एक ७-८ वर्षीय फटेहाल बालक आया और जूठी प्लेटों की ओर इशारा करके चाट वाले से
बोला-
“बाबूजी, ये
प्लेटें धो दूँ? सुबह से भूखा हूँ लेकिन काम नहीं
मिला”।
“नहीं मुझे आवश्यकता नहीं है बच्चे,
आगे
देखो...”
रमा ने बालक को चाट दिलानी चाही लेकिन उसने इंकार
करते हुए कहा- “मैं भिखारी नहीं हूँ माँ जी”।
garmee kee
ek shaam ko ramaa chaupaatee par apane pati amit ke saath chaat kaa aanand le rahee thee,
tabhee
wahaan ek 7-8 warsheey phatehaal baalak aayaa aur joothee pleton kee or ishaaraa karake chaat waale se
bolaa-
“baaboojee, ye
pleten dho doon? subah se bhookhaa hoon lekin kaam naheen
milaa”
“naheen mujhe aawashyakataa naheen hai bachche,
aage
dekho”
ramaa ne baalak ko chaat dilaanee chaahee lekin usane inkaar
karate hue kahaa- “main bhikhaaree naheen hoon maan jee”
गर्मी की
एक शाम को रमा चौपाटी पर अपने पति अमित के साथ चाट का आनंद ले रही थी,
तभी
वहाँ एक ७-८ वर्षीय फटेहाल बालक आया और जूठी प्लेटों की ओर इशारा करके चाट वाले से
बोला-
“बाबूजी, ये
प्लेटें धो दूँ? सुबह से भूखा हूँ लेकिन काम नहीं
मिला”।
“नहीं मुझे आवश्यकता नहीं है बच्चे,
आगे
देखो...”
रमा ने बालक को चाट दिलानी चाही लेकिन उसने इंकार
करते हुए कहा- “मैं भिखारी नहीं हूँ माँ जी”।